झीरम के 10 दोषियों की पूरी कहानी: किसी ने लूटे हथियार, किसी ने जुटाया चावल-राशन, ऐसे रची गई थी झीरम की खूनी साजिश
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी हत्याकांड में करीब 13 साल बाद अदालत ने 10 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। 16 सितंबर 2026 को जगदलपुर की विशेष NIA अदालत ने यह फैसला सुनाया। इससे पहले 5 सितंबर को अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया था। मामले में 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई शुरू हुई थी, लेकिन ट्रायल के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई।
इस पूरे मामले में जांच और अभियोजन के दौरान आरोपियों की अलग-अलग भूमिकाएं सामने रखी गईं। किसी पर सीधे हमले में शामिल होने, किसी पर हथियार लूटने तो किसी पर हमले के लिए राशन और अन्य लॉजिस्टिक व्यवस्था करने की भूमिका बताई गई।
किस आरोपी की क्या भूमिका रही?
1. प्रमिला मोडियाम उर्फ ज्योति
जांच के मुताबिक प्रमिला मोडियाम मिलिट्री कंपनी नंबर-2 के हथियारबंद कैडरों के साथ झीरम घाटी पहुंची थी। उस पर हमले में सीधे शामिल होने, फायरिंग करने और सुरक्षा बलों के हथियार लूटने की भूमिका बताई गई।
2. चैतू लेकाम उर्फ मुन्ना
चैतू लेकाम को PLGA का सेक्शन कमांडर बताया गया। अभियोजन के अनुसार वह पिड़िया के जंगल से अपने दस्ते के साथ झीरम पहुंचा था। उसके पास से बरामद विस्फोटकों को FSL जांच के जरिए हमले में इस्तेमाल सामग्री से जोड़े जाने की बात सामने आई।
3. सुमित्रा पुनेम मोडियाम
सुमित्रा पुनेम को हमले की कोर टीम में शामिल बताया गया। अभियोजन के अनुसार वह घटनास्थल पर मौजूद थी और कांग्रेस काफिले को घेरने तथा हमले की कार्रवाई में उसकी भूमिका थी।
4. मुक्का मांडवी
मुक्का मांडवी पर हथियार लेकर हमले में शामिल होने का आरोप था। जांच में उस पर पुलिसकर्मियों पर हमला करने, हथियार छीनने और काफिले पर फायरिंग में शामिल होने की भूमिका बताई गई।
5. कोसा कवासी उर्फ कोसाराम
कोसा कवासी पर हमले के दौरान मोर्चा संभालने और मारे गए पुलिसकर्मियों से INSAS राइफल सहित अन्य हथियार लेकर जंगल की ओर जाने की भूमिका बताई गई।
6. आयता मरकाम
आयता मरकाम की भूमिका हमले के लॉजिस्टिक इंतजाम से जुड़ी बताई गई। अभियोजन के अनुसार कोलेंग और कंडानार क्षेत्र के गांवों से बड़ी संख्या में माओवादियों के लिए चावल और अन्य राशन जुटाकर झीरम तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी।
7. मड़कामी देवा
मड़कामी देवा को दरभा डिवीजन कमेटी का सदस्य बताया गया। उस पर हमले के लिए लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने, सुरक्षा बलों की गतिविधियों से जुड़ी जानकारी देने और साजिश से संबंधित बैठकों में शामिल होने की भूमिका बताई गई।
8. जोगा मड़कामी
जोगा मड़कामी पर घटनास्थल पर हथियारबंद मौजूद रहने और हमले में सीधे शामिल होने का आरोप था। अभियोजन के अनुसार वह काफिले पर फायरिंग करने वाले समूह का हिस्सा था।
9. बंजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ देंगा
बंजामी सन्ना को दरभा डिवीजन कमेटी की सदस्य बताया गया। उसके खिलाफ हमले से पहले चावल और अन्य लॉजिस्टिक जुटाने के साथ गांवों से लेवी के रूप में धन वसूलने की भूमिका भी मामले में सामने रखी गई।
10. महादेव नाग
महादेव नाग की घटनास्थल पर मौजूदगी को लेकर गवाहों और दर्ज बयानों का हवाला अभियोजन की ओर से दिया गया। उस पर हमले को अंजाम देने वाली टीम का हिस्सा होने की भूमिका बताई गई।
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101 गवाहों के बयान, करीब 1000 पन्नों की चार्जशीट
झीरम घाटी केस की सुनवाई लंबे समय तक चली। रिपोर्टों के मुताबिक अभियोजन पक्ष ने अदालत में 101 गवाहों के बयान दर्ज कराए। NIA ने मामले में 2014 में पहली चार्जशीट दाखिल की थी और 2015 में सप्लीमेंट्री चार्जशीट पेश की गई थी। मीडिया रिपोर्टों में 2015 की चार्जशीट को करीब 1000 पन्नों का बताया गया है। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार 25 मई 2013 के हमले में 27 लोगों की मौत और 38 लोगों के घायल होने का उल्लेख है। एजेंसी के रिकॉर्ड में हमले के दौरान हथियार और अन्य सामान लूटे जाने की भी जानकारी दर्ज है।
25 मई 2013 को क्या हुआ था?
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी से गुजर रहा था। इसी दौरान माओवादियों ने काफिले को निशाना बनाकर हमला किया। इस हमले में तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, विद्याचरण शुक्ल समेत कई कांग्रेस नेताओं, सुरक्षा कर्मियों और अन्य लोगों की मौत हुई थी। NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड में 27 मौतों और 38 घायलों का आंकड़ा दर्ज है।
अब आगे क्या होगा?
विशेष NIA अदालत द्वारा मृत्युदंड सुनाए जाने के बाद मामले की अगली कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। मृत्युदंड के मामलों में उच्च न्यायालय की पुष्टि की प्रक्रिया होती है। इसके अलावा दोषियों के पास फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में कानूनी चुनौती देने का रास्ता भी रहता है। झीरम घाटी केस में अब अदालत के फैसले के बाद अगली कानूनी कार्रवाई और हाईकोर्ट में होने वाली प्रक्रिया पर नजर रहेगी।
