ब्रिक्स मंच से WHO चीफ की खुली चेतावनी, नेताओं के सामने रखा 4 सूत्रीय हेल्थ एजेंडा

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसस ने 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मंच से सदस्य देशों को भविष्य की महामारियों के प्रति आगाह किया है। उन्होंने ब्रिक्स नेताओं से पुरजोर अपील की कि वे किसी भी अगली वैश्विक स्वास्थ्य आपात स्थिति के आने से पहले ही अपने स्वास्थ्य ढांचे और रेज़िलिएंस को चाक-चौबंद कर लें। डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने रेखांकित किया कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के चार मुख्य स्तंभ लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता सीधे तौर पर वैश्विक लोक स्वास्थ्य की रीढ़ हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने संबोधन के प्रमुख अंश साझा करते हुए टेड्रोस ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सतत प्रगति इन चारों स्तंभों को मजबूत करके ही संभव है:
रेज़िलिएंस: प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल सर्विलांस, अर्ली वॉर्निंग सिस्टम और दवाओं के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देकर।
इनोवेशन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल हेल्थ टूल्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में लागू कर, जिससे तकनीक का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
सहयोग: सीमा पार रणनीतिक साझेदारी और ‘पैथोजन एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग’ (PABS) समझौते को अंतिम रूप देकर।
सस्टेनेबिलिटी: स्वास्थ्य क्षेत्र में दीर्घकालिक वित्तीय निवेश जुटाकर एक पारदर्शी और मजबूत वैश्विक स्वास्थ्य ढांचा तैयार करना।

ब्रिक्स नेताओं के सामने रखीं 4 मांगें

डब्ल्यूएचओ डीजी ने भविष्य के संकटों से बचाव के लिए ब्रिक्स नेतृत्व से चार अहम बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की:

  • अगली स्वास्थ्य इमरजेंसी आने से पहले ही बुनियादी तंत्र को अभेद्य बनाएं।
  • उन स्वास्थ्य समस्याओं और पिछड़े इलाकों में नवाचार को बढ़ावा दें, जहां बाजार के मॉडल विफल साबित होते हैं।
  • सीमाओं और भू-राजनीतिक मतभेदों से परे जाकर
  • व्यावहारिक स्वास्थ्य सहयोग को जमीन पर उतारें।
  • मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, त्वरित क्रियान्वयन और जवाबदेही के साथ दीर्घकालिक नीतियां बनाएं।

नई दिल्ली घोषणापत्र: टीबी से जंग और अर्ली वॉर्निंग सिस्टम पर मुहर

सम्मेलन के दौरान अपनाए गए ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में ब्रिक्स देशों ने सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) को जन-केंद्रित बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। चंडीगढ़ में आयोजित 16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के आधार पर तपेदिक (TB) को वैश्विक चुनौती मानते हुए शोध और साझा निवेश बढ़ाने का संकल्प लिया गया। इसके अलावा महामारियों की समय रहते रोकथाम के लिए ‘ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम’ सब-वर्किंग ग्रुप के गठन का स्वागत किया गया।

पारंपरिक चिकित्सा (TCIM) को मिला अंतरराष्ट्रीय मंच

घोषणापत्र में पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा (TCIM) के क्षेत्र में वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी है। केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री और स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि नई दिल्ली घोषणापत्र में पारंपरिक चिकित्सा को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलना भारत के लिए गर्व का विषय है। भारत आधुनिक वैज्ञानिक शोध, सख्त गुणवत्ता मानकों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी के जरिए आयुर्वेद सहित तमाम पारंपरिक उपचार प्रणालियों को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिससे दुनिया को सुरक्षित और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।

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