ज्यादा नंबर लाकर भी वंचित? जबलपुर हाईकोर्ट ने खोला MP शिक्षक भर्ती का बड़ा राज, पलटा सिंगल बेंच का फैसला
जबलपुर। मध्य प्रदेश में साल 2018 में हुई शिक्षक भर्ती को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट ने एक बड़ा और राहत भरा फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने मेरिट सूची में आने वाले अभ्यर्थियों के हक में फैसला देते हुए सिंगल बेंच के पुराने आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत ने सख्त लहजे में कहा है कि मेरिट सूची में जगह बनाने वाले योग्य अभ्यर्थियों के अधिकारों का किसी भी कीमत पर हनन नहीं होना चाहिए।
क्या है हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी?
डबल बेंच ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि जिस उम्मीदवार ने अपनी योग्यता के दम पर ज्यादा अंक हासिल किए हैं, उसे कम अंक पाने वाले उम्मीदवार की तुलना में निचले पायदान या किसी ‘नुकसानदायक जगह’ पर तैनात नहीं किया जा सकता। यह न्याय के मूल सिद्धांत के खिलाफ है।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा विवाद साल 2018 में स्कूल शिक्षा विभाग और आदिवासी कल्याण विभाग द्वारा की गई भर्तियों की पदस्थापना से जुड़ा है। इस मामले में रामनाथ शाह और अन्य अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्होंने अनारक्षित कैटेगरी में तय कट-ऑफ से भी ज्यादा अंक हासिल किए थे। उनकी पहली पसंद ‘स्कूल शिक्षा विभाग’ थी लेकिन अच्छे अंक लाने के बावजूद उन्हें ‘आदिवासी कल्याण विभाग’ में तैनाती दे दी गई। यह उनके मेरिट में आने के बावजूद उनके साथ सीधा अन्याय था।
हाई कोर्ट ने सरकार को दिए ये निर्देश
मामले की गंभीरता और अभ्यर्थियों की मेरिट को देखते हुए जबलपुर हाई कोर्ट ने संबंधित विभागों को दो टूक निर्देश दिए हैं।
मेरिट का सम्मान: अभ्यर्थियों की पदस्थापना (Posting) पर उनकी मेरिट के आधार पर दोबारा विचार किया जाए।
चॉइस फिलिंग का मौका: अभ्यर्थियों को ‘चॉइस फिलिंग’ के आधार पर उनकी प्राथमिकता वाले दूसरे विभाग में जाने का मौका दिया जाए, ताकि उनके साथ न्याय हो सके।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद उन तमाम अभ्यर्थियों में खुशी की लहर है, जो अच्छे नंबर लाने के बावजूद अपने मनचाहे विभाग में पोस्टिंग पाने से वंचित रह गए थे।
