चीनी की बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई टेंशन: सरकार ने खोला आयात का रास्ता, बाहर से आएगी 10 लाख टन चीनी

Sugar Price Hike

देश में चीनी के लगातार बढ़ते दामों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। घरेलू बाजार में कीमतों में तेज उछाल और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार ने करीब एक दशक बाद कच्ची चीनी के आयात को आसान कर दिया है। इसके तहत 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी बिना कस्टम ड्यूटी के भारत लाई जा सकेगी।

सरकार का मकसद घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर बढ़ते दबाव को कम करना है। त्योहारी मौसम में मिठाई, पेय पदार्थ और अन्य खाद्य उत्पादों की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए इस फैसले को अहम माना जा रहा है।

DGFT ने बदली आयात नीति

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने गुरुवार को कच्ची चीनी की आयात नीति में बदलाव किया। नई व्यवस्था के तहत Tariff Rate Quota (TRQ) के माध्यम से 10 लाख मीट्रिक टन तक कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी गई है।

TRQ व्यवस्था के तहत निर्धारित मात्रा तक आने वाली चीनी पर कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी। सरकार को उम्मीद है कि इससे विदेशी बाजार से अतिरिक्त चीनी भारत आएगी और घरेलू सप्लाई में सुधार होगा।

यह व्यवस्था खास तौर पर Exim Code 170114 के तहत आने वाली कच्ची चीनी पर लागू होगी और इसकी ड्यूटी फ्री आयात की समयसीमा 31 अक्टूबर तक रखी गई है।

दो महीने में करीब 40 फीसदी बढ़े दाम

चीनी की कीमतों में हाल के दिनों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। घरेलू बाजार में पिछले करीब दो महीनों के दौरान चीनी के भाव लगभग 40 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। ऐसे समय में त्योहारी सीजन की मांग बढ़ने से कीमतों पर और दबाव बनने की आशंका थी।

भारत दुनिया के प्रमुख चीनी उपभोक्ता देशों में शामिल है। इसलिए घरेलू बाजार में सप्लाई और कीमतों का संतुलन बनाए रखना सरकार के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।

बाजार में बढ़ सकती है चीनी की सप्लाई

आयात की गई कच्ची चीनी को देश की रिफाइनरियों और चीनी मिलों में प्रोसेस करके बाजार में उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे घरेलू सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है और कीमतों में तेजी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आयातित चीनी कितनी तेजी से भारत पहुंचती है और प्रोसेसिंग के बाद कितनी मात्रा में बाजार में उपलब्ध कराई जाती है।

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एडवांस अथॉराइजेशन वाली कंपनियों को भी विकल्प

सरकार ने उन कंपनियों के लिए भी व्यवस्था की है, जिनके पास SION E-52 के तहत Advance Authorisation मौजूद है। ऐसी कंपनियों को पहले आयात की गई कच्ची चीनी को नई TRQ व्यवस्था के तहत बदलने का विकल्प दिया गया है। हालांकि, इसके लिए कुछ वित्तीय शर्तें भी तय की गई हैं।

GST छूट लेने वाली कंपनियों को करना होगा भुगतान

नई व्यवस्था में शामिल होने वाली उन कंपनियों को, जिन्होंने कच्ची चीनी के आयात के समय GST में छूट का लाभ लिया था, उस छूट की राशि वापस चुकानी होगी। इसके अलावा आयातित कच्ची चीनी से तैयार होने वाली रिफाइंड चीनी को 31 अक्टूबर 2026 तक घरेलू बाजार में बेचना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आयात का फायदा वास्तविक रूप से घरेलू बाजार और उपभोक्ताओं तक पहुंचे।

पहले भी स्टॉक लिमिट लगा चुकी है सरकार

चीनी की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार पहले भी कदम उठा चुकी है। इससे पहले 1 अगस्त से 30 नवंबर तक चीनी डीलरों के लिए स्टॉक लिमिट लागू की गई थी।

इसका उद्देश्य जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाना तथा बाजार में पर्याप्त मात्रा में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना था। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने भी चीनी की एक्स-मिल कीमतों में तेजी को मौजूदा मांग और सप्लाई की स्थिति के मुकाबले असामान्य बताया था।

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