भारत-जापान के बीच रक्षा क्षेत्र में हुआ बड़ा समझौता: ‘महासागर’ विजन और ‘मेक इन इंडिया’ डील पर राजनाथ सिंह की अहम चर्चा

नई दिल्ली। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बीच गुरुवार को नई दिल्ली में एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक में हिंद-प्रशांत  क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री व्यापार की आजादी और दोनों देशों की रणनीतिक पहलों को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा की गई।

‘महासागर’ और FOIP में तालमेल की जरूरत

बैठक के दौरान राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत के महासागर विजन और जापान की फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक पहल के बीच अब पहले से कहीं ज्यादा करीबी तालमेल की जरूरत है।

रक्षा मंत्री ने हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की सुरक्षा को एक-दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ बताया। भारत का यह विजन समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र प्रगति पर आधारित है।

समुद्री खतरों और नेविगेशन की आजादी पर जोर

राजनाथ सिंह ने समुद्री जीवन-रेखाओं को मिल रहे बढ़ते खतरों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि नेविगेशन, ओवरफ्लाइट और बिना किसी रुकावट के वैध व्यापार की आजादी सुनिश्चित करना न सिर्फ एक आर्थिक जरूरत है, बल्कि यह सामरिक और रणनीतिक रूप से भी बेहद जरूरी है।

भूकंप पीड़ितों के प्रति संवेदना और भारत का सहयोग

बुधवार को मुंबई में वेस्टर्न नेवल कमांड के कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद जापानी प्रतिनिधिमंडल दिल्ली पहुंचा था। राजनाथ सिंह ने जापान के कुमामोटो क्षेत्र में आए विनाशकारी भूकंप पर गहरी संवेदना व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि भारत सरकार और भारतीय जनता की ओर से हम जापान के साथ पूरी एकजुटता जताते हैं। जरूरत पड़ने पर भारत हरसंभव राहत और सहयोग देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

‘मेक इन इंडिया’ और 75 वर्षों की कूटनीति

रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि भारत और जापान के रिश्ते साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और सदियों पुराने सभ्यतागत जुड़ाव पर टिके हैं। अगले साल दोनों देशों के राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं।

बैठक के बाद राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बताया कि यह मुलाकात बेहद फायदेमंद रही। चर्चा का मुख्य केंद्र समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना, रक्षा तकनीक में मेक इन इंडिया को बढ़ावा देना और दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास को बढ़ाना रहा।

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