Gold Mine Accident: सोना निकालने गए थे, मौत के मलबे में दब गए! खदान ढहने से 30 खनिकों की मौत

Gold Mine Accident

Gold Mine Accident: सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक में सोने की पारंपरिक खदान अचानक ढह गई। हादसे में अब तक 30 खनिकों के शव बरामद किए जा चुके हैं

Gold Mine Accident: सोना निकालने की उम्मीद लेकर खदान में उतरे खनिकों को जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही देर में यही खदान उनकी कब्र बन जाएगी। आखिर कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा और क्या बढ़ सकता है मृतकों का आंकड़ा? पढ़िए पूरी खबर।

Gold Mine Accident: सोने की खदान में अचानक मची तबाही, 30 खनिकों की मौत

Gold Mine Accident: सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक से एक बेहद दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है। देश के पश्चिमी हिस्से में स्थित एक पारंपरिक सोने की खदान अचानक ढह गई। खदान के अंदर काम कर रहे खनिकों को संभलने तक का मौका नहीं मिला और देखते ही देखते कई लोग मलबे के नीचे दब गए।

इस भयावह हादसे में कम से कम 30 खनिकों की मौत की पुष्टि हुई है। वहीं कई अन्य लोगों के अब भी खदान के अंदर फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है।

सोना निकालने गए थे खनिक, अचानक धंस गई खदान

जानकारी के अनुसार, यह हादसा नाना-मामबेरे प्रीफेक्चर के अब्बा इलाके में हुआ। यहां पारंपरिक तरीके से सोने का खनन किया जाता है और आधुनिक तकनीक एवं सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल बेहद सीमित बताया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि खदान में खनिक रोज की तरह सोना निकालने के काम में जुटे हुए थे। इसी दौरान अचानक खदान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। कुछ ही पलों में अंदर काम कर रहे कई खनिक मलबे और मिट्टी के नीचे दब गए।

हादसे की खबर फैलते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग और बचाव दल खदान की ओर दौड़े और अंदर फंसे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की गई।

अब तक 30 शव खदान से निकाले गए

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, कई घंटों की मशक्कत के बाद बचावकर्मियों ने खदान से 30 शव बरामद किए हैं। कुछ घायल खनिकों को भी बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया है, जहां उनका इलाज जारी है।

नाना-मामबेरे इलाके के डिप्टी मेयर सुलेमान बी ने हादसे को बेहद भयावह बताया। उन्होंने कहा कि अभी भी कई लोग खदान के अंदर फंसे हो सकते हैं और उन्हें बाहर निकालने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।

मलबे में अब भी कई जिंदगी फंसी होने की आशंका

सबसे बड़ी चिंता इस बात को लेकर है कि खदान के अंदर कितने लोग फंसे हुए हैं, इसका अभी तक सटीक आंकड़ा सामने नहीं आया है। बचावकर्मी लगातार मलबा हटाकर अंदर फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं।

हालांकि पारंपरिक खदान होने और सीमित सुरक्षा इंतजामों के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है। मलबे और मिट्टी के नीचे दबे लोगों तक पहुंचने के लिए बचावकर्मियों को काफी सावधानी बरतनी पड़ रही है।

प्रशासन को आशंका है कि जैसे-जैसे रेस्क्यू अभियान आगे बढ़ेगा, मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।

हादसे के बाद मौके पर मची अफरा-तफरी

खदान ढहने के बाद घटनास्थल का मंजर बेहद भयावह था। स्थानीय लोग अपने साथियों और परिवार के सदस्यों की तलाश में इधर-उधर भागते नजर आए।

सामने आए फुटेज में बचाव अभियान के दौरान कीचड़ से सने युवक और महिला खनिक मलबे से शव निकालते दिखाई दे रहे हैं। हादसे के बाद पूरा इलाका चीख-पुकार और अफरा-तफरी से भर गया।

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लोगों से मदद की अपील

स्थानीय प्रशासन ने स्वयंसेवी संगठनों और आम लोगों से भी राहत एवं बचाव अभियान में सहयोग की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि जो लोग अभी भी खदान के अंदर फंसे हो सकते हैं, उन्हें जल्द से जल्द बाहर निकालना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।

फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन की नजर अब इस बात पर है कि मलबे के अंदर और कितने लोग फंसे हैं और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में कितनी सफलता मिलती है।

यह हादसा एक बार फिर पारंपरिक खनन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों, आधुनिक उपकरणों और खनिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

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