छात्र आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट में बिहार सरकार का बड़ा खुलासा; भीड़ में फंसे सिपाही ने चलाई थी AK-47
Bihar Student Protest: छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और कथित अत्यधिक बल प्रयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच बिहार सरकार और दिल्ली पुलिस ने अपना जवाब दाखिल किया है। बिहार सरकार ने अपने हलफनामे में सीवान में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से हथियार चलाए जाने की घटनाओं का विवरण दिया है। सरकार के मुताबिक, एक पुलिसकर्मी ने भीड़ में घिरने के बाद आत्मरक्षा में AK-47 से हवा में फायरिंग की थी।
सरकार ने यह भी बताया कि एक अन्य स्थान पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 9 एमएम सर्विस पिस्टल से फायरिंग की गई, जिसमें तीन प्रदर्शनकारियों को मामूली चोटें आईं। मामले से जुड़े तथ्यों की जांच जारी है।
भीड़ में फंसे सिपाही ने AK-47 से की हवाई फायरिंग
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 25 जुलाई को सीवान के जेपी चौक पर छात्र संगठनों के प्रदर्शन के दौरान स्थिति बिगड़ गई थी। प्रदर्शन के दौरान एक डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) का सिपाही कथित तौर पर भारी भीड़ के बीच घिर गया।
हलफनामे के अनुसार, सिपाही ने अपनी जान बचाने और आत्मरक्षा के लिए AK-47 से चार राउंड हवा में फायर किए। सरकार ने स्पष्ट किया कि इस फायरिंग में किसी प्रदर्शनकारी या छात्र के घायल होने की सूचना नहीं है।
हालांकि, बिहार सरकार ने यह भी स्वीकार किया कि AK-47 सामान्य कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला हथियार नहीं है। इसे प्लाटून स्तर का हथियार बताते हुए सरकार ने कहा कि संबंधित सिपाही के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
सिपाही निलंबित, विभागीय जांच शुरू
सरकार के मुताबिक, AK-47 के इस्तेमाल को अनुचित मानते हुए संबंधित पुलिसकर्मी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उसके खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की गई है।
सरकार का कहना है कि इस मामले में हथियार के इस्तेमाल की परिस्थितियों और पुलिसकर्मी के आचरण की जांच की जा रही है।
हाथी चौक पर 9 एमएम पिस्टल से चली गोलियां
सरकार ने सीवान के जेपी चौक और हाथी चौक की घटनाओं को अलग-अलग बताया है। हलफनामे के मुताबिक, जेपी चौक से करीब डेढ़ से दो किलोमीटर दूर हाथी चौक पर भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान एक सहायक उप-निरीक्षक ने अपनी 9 एमएम सर्विस पिस्टल से दो राउंड फायर किए।
इस घटना में तीन प्रदर्शनकारियों को छर्रे लगने से मामूली चोटें आईं। उन्हें पटना के मेदांता अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। इलाज के बाद तीनों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
सरकार ने स्पष्ट किया कि इन तीन घायलों का संबंध AK-47 से हुई हवाई फायरिंग से नहीं था। मामले में बैलिस्टिक जांच भी कराई जा रही है।
read more : Tata Sons AGM Postponed: 100 साल के इतिहास में पहली बार टली AGM, कोरम पूरा नहीं होने से अटका मामला
हिंसा में 157 पुलिसकर्मी घायल
बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर जवाबी हलफनामे में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा का भी उल्लेख किया। सरकार के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया और पुलिसकर्मियों पर पथराव किया गया।
सरकार का दावा है कि इस हिंसा में 157 पुलिसकर्मी और 7 प्रशासनिक अधिकारी घायल हुए। छपरा में एक प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) की आंख में गंभीर चोट लगने की बात भी हलफनामे में कही गई है।
69 FIR में 500 गिरफ्तारियां
सरकार के अनुसार, 22 से 25 जुलाई के बीच प्रदर्शन से जुड़े मामलों में कुल 69 FIR दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले 222 छात्रों को जमानत पर रिहा किया गया है। वहीं, 75 नाबालिगों को बॉन्ड भरवाने के बाद छोड़े जाने की जानकारी भी सरकार ने दी है।
CCTV और वीडियो फुटेज सुरक्षित
बिहार सरकार ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े वीडियो फुटेज तथा CCTV रिकॉर्ड को सुरक्षित रखा गया है। इन साक्ष्यों का इस्तेमाल जांच में किया जा रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस की कार्रवाई, बल प्रयोग की परिस्थितियों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों से जुड़े पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट में विचार किया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने भी रखा अपना पक्ष
इसी मामले में दिल्ली पुलिस ने भी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपना जवाब दाखिल किया है। पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के दौरान न्यूनतम और नियंत्रित बल का इस्तेमाल किया गया।
अब सुप्रीम कोर्ट में दोनों पक्षों के जवाब और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मामले के विभिन्न पहलुओं पर आगे सुनवाई होगी।
