PM मोदी के ‘दिमागी नक्सली’ बयान के बाद सोशल मीडिया पर नया ट्रेंड, ‘Dimagi Naxal Party’ पेज के 2.43 लाख फॉलोअर्स

Dimagi Naxal

नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले से दिए गए संबोधन में नक्सलवाद को लेकर की गई टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर एक नया डिजिटल ट्रेंड तेजी से उभरता दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री ने जंगलों में हथियार उठाकर हिंसा करने वाले नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई का जिक्र करते हुए वैचारिक स्तर पर सक्रिय उन लोगों को लेकर भी आगाह किया, जिन्हें उन्होंने ‘दिमागी नक्सली’ कहा।

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद सोशल मीडिया यूजर्स के एक वर्ग ने इसी शब्द को लेकर मीम, वीडियो और व्यंग्यात्मक पोस्ट बनाना शुरू कर दिया। इसी क्रम में ‘Dimagi Naxal Party’ नाम से एक सोशल मीडिया पेज सामने आया, जिसने बेहद कम समय में बड़ी संख्या में यूजर्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

कुछ ही समय में 2.43 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स

इंस्टाग्राम पर ‘Dimagi Naxal Party’ (@dimaginaxalpartyy) नाम से बनाए गए पेज पर तेजी से फॉलोअर्स बढ़े हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पेज पर अब तक 83 से ज्यादा पोस्ट शेयर की जा चुकी हैं और इसके फॉलोअर्स की संख्या 2.43 लाख से अधिक पहुंच गई है।

इंस्टाग्राम के अलावा यह नाम एक्स और फेसबुक जैसे दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी चर्चा में है। हालांकि, सोशल मीडिया पर किसी पेज के तेजी से बढ़ने के आंकड़े समय के साथ बदल सकते हैं।

‘Think, Research, Resist’ बना पेज का संदेश

‘Dimagi Naxal Party’ के प्रोफाइल पर ‘Think | Research | Resist’ स्लोगन दिखाई देता है। पेज पर युवाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों के अलावा सामाजिक और राजनीतिक विषयों पर व्यंग्यात्मक कंटेंट पोस्ट किया जा रहा है।

कई वीडियो और मीम्स के जरिए बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक व्यवस्था और धर्म से जुड़ी राजनीति जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को ही अपने व्यंग्यात्मक परिचय के तौर पर इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।

बयान से निकला शब्द, सोशल मीडिया पर बनी डिजिटल पहचान

सोशल मीडिया पर चल रहा यह ट्रेंड इस बात का उदाहरण है कि राजनीतिक भाषणों में इस्तेमाल किए गए शब्द किस तरह इंटरनेट पर अलग संदर्भ और अर्थ के साथ दोबारा सामने आ सकते हैं।

प्रधानमंत्री के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सली’ शब्द को जहां समर्थक वैचारिक नक्सलवाद के संदर्भ में देख रहे हैं, वहीं सोशल मीडिया पर कुछ यूजर्स इसे सरकार और व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए व्यंग्य के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं।

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मीम और रील्स के जरिए हो रही प्रतिक्रिया

इस डिजिटल ट्रेंड में रील्स, मीम्स और छोटे वीडियो सबसे प्रमुख माध्यम बने हुए हैं। कई पोस्ट में गंभीर राजनीतिक मुद्दों को हास्य और व्यंग्य के साथ पेश किया जा रहा है।

इसकी वजह से ‘दिमागी नक्सल’ शब्द सोशल मीडिया पर केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक तरह के ऑनलाइन मीम और डिजिटल पहचान के रूप में भी इस्तेमाल होने लगा है।

पहले के वायरल डिजिटल अभियानों से तुलना

सोशल मीडिया पर इस नए ट्रेंड की तुलना पहले वायरल हो चुके कुछ व्यंग्यात्मक डिजिटल अभियानों से भी की जा रही है। इनमें ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम से चलाया गया अभियान भी शामिल है।

हालांकि दोनों अभियानों के संदर्भ अलग हैं, लेकिन सोशल मीडिया पर किसी राजनीतिक या सार्वजनिक टिप्पणी को लेकर नया नाम, मीम या डिजिटल पहचान बनाकर सामूहिक प्रतिक्रिया देने का तरीका दोनों में समान नजर आता है।

‘दिमागी नक्सली’ शब्द पर जारी है बहस

प्रधानमंत्री के संबोधन के बाद ‘दिमागी नक्सली’ शब्द को लेकर सोशल मीडिया पर समर्थन और विरोध दोनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ इसे वैचारिक नक्सलवाद के खिलाफ चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ डिजिटल यूजर्स इसे राजनीतिक व्यंग्य का माध्यम बना रहे हैं।

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