सिंगरौली में लापरवाही की हद: राज्यमंत्री की मौजूदगी में बिगड़े हालात, दर्जनों छात्राएं अचेत; प्राइवेट स्कूलों ने क्यों साधी दूरी?

सिंगरौली (चितरंगी)। मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले से एक दिल दहला देने वाला और प्रशासनिक संवेदनहीनता का बड़ा मामला सामने आया है। चितरंगी में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित ‘हर घर तिरंगा’ यात्रा के दौरान भीषण गर्मी और अव्यवस्था के चलते दर्जनों स्कूली छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई। कई छात्राएं तेज धूप और प्यास के कारण मौके पर ही बेसुध होकर गिर पड़ीं, जिससे पूरे कार्यक्रम में हड़कंप और अफरा-तफरी मच गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह पूरा वाकया सूबे की राज्यमंत्री राधा सिंह की मौजूदगी में हुआ।

न पानी का इंतजाम, न मेडिकल टीम-सड़क पर तड़पते रहे बच्चे

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब यह रैली निकाली गई, उस वक्त दोपहर की चिलचिलाती धूप और तापमान अपने चरम पर था। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारियों ने मासूम बच्चों के लिए बुनियादी इंतजाम तक नहीं किए थे:

पीने के पानी का अभाव: पूरे रैली मार्ग पर बच्चों के लिए पीने के शुद्ध पानी की कोई व्यवस्था नहीं थी।
गायब रहा स्वास्थ्य विभाग: इतनी बड़ी संख्या में बच्चों के शामिल होने के बावजूद एम्बुलेंस या डॉक्टरों की कोई टीम मौके पर तैनात नहीं थी।
मदद को दौड़े स्थानीय लोग: जब छात्राएं गश खाकर गिरने लगीं, तब स्थानीय नागरिकों और शिक्षकों ने आनन-फानन में बच्चों को संभाला और प्राथमिक राहत दी।

प्राइवेट स्कूलों ने बनाई दूरी, सरकारी बच्चों पर ही क्यों भारी पड़ी रैली?

इस घटना ने एक बार फिर व्यवस्था की दोहरी मानसिकता को उजागर कर दिया है। यात्रा में जहां क्षेत्र के निजी स्कूलों का एक भी छात्र नजर नहीं आया, वहीं सरकारी स्कूलों के गरीब बच्चों को इस तपती धूप में पैदल चलने के लिए मजबूर किया गया।

स्थानीय अभिभावकों का आक्रोश

हर बड़े सरकारी या राजनीतिक आयोजन में भीड़ जुटाने के लिए सिर्फ सरकारी स्कूल के गरीब बच्चों को ही क्यों झोंका जाता है? क्या इन मासूमों के स्वास्थ्य और जान की कोई कीमत नहीं है?

राज्यमंत्री के सामने बेनकाब हुआ सिस्टम

हैरानी की बात यह है कि इस पूरी यात्रा का नेतृत्व और मौजूदगी राज्यमंत्री राधा सिंह के पास थी। उनके सामने ही कुप्रबंधन के चलते मासूम बच्चियां गिरती रहीं। इस घटना के बाद से स्थानीय प्रशासन, शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर बिना पुख्ता सुरक्षा और व्यवस्था के मासूमों को इस भीषण गर्मी में रैली की आग में क्यों झोंक दिया गया?

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