संसद के भीतर बवाल, बाहर बंदर का खिलौना… मानसून सत्र में 11 बिल को हरी झंडी, जानिए 96 घंटे क्यों हुए बर्बाद?
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र गुरुवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। जनहति के मुद्दों, विधायी कार्यों और देश के ज्वलंत विष्यों पर चर्चा के लिए बुलाया गया यह सत्र एक बार फिर राजनीतिक रस्साकशी और जबरदस्त हंगामे की भेंट चढ़ गई। सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पूरी केंद्रीय कैबिनेट और विपक्ष के नेता राहुल गांधी मौजूद रहे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन के बाद सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी।
सत्र के अंतिम दिन जहां राज्यसभा में माइंस एंड मिनरल्स संशोधन बिल पास हुआ, वहीं सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक गरमा-गर्मी अपने चरम पर रही।
आंकड़ों में संसद की बदहाली
मानसून सत्र में हंगामे और शोर-शराबे के कारण जनता के करोड़ों रुपये और अमूल्य समय की घोर बर्बादी देखने को मिली:
लोकसभा का रिपोर्ट कार्ड: मानसून सत्र में लोकसभा की कुल 19 बैठकें आयोजित की गई थीं। नियमतः 114 घंटे कार्यवाही होनी थी लेकिन हंगामा और स्थगन के चलते काम महज 17 घंटे 30 मिनट ही हो सका। यानी लगभग 96 घंटे 30 मिनट काम पूरी तरह ठप रहा।
राज्यसभा का हाल: उच्च सदन में भी स्थिति कुछ खास अलग नहीं रही। 114 घंटे के निर्धारित समय में से राज्यसभा में सिर्फ 37 घंटे 24 मिनट ही कामकाज हो सका जबकि 76 घंटे 36 मिनट हंगामे की भेंट चढ़ गए।
12 में से 11 महत्वपूर्ण बिल पास: कानून बनाने की रफ्तार रही कायम
तमाम गतिरोधों और वॉकआउट के बावजूद मोदी सरकार ने विधायी एजेंडे को तेजी से आगे बढ़ाया। इस मानसून सत्र में कुल 12 नए विधेयक पेश किए गए।
ये बिल टैक्स रिफॉर्म्स, बैंकिंग सेक्टर, माइनिंग, ट्रिब्यूनल्स, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली व नकल रोकने, केरल का नाम बदलने (केरला) और सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या जैसे बेहद अहम विषयों से जुड़े हैं।
आखिरी दिन MMDR बिल पास होने के साथ ही 12 में से 11 बिल दोनों सदनों से पारित हो चुके हैं। केवल ‘भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक’ अभी लंबित है।
‘हल्द्वानी शुद्धिकरण’ पर खड़गे का छलका दर्द, जेपी नड्डा बोले- ‘भाजपा समर्थन नहीं करती’
सत्र के अंतिम दिन राज्यसभा में कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के एक बयान ने सदन का माहौल गरमा दिया।
खड़गे का आरोप: खड़गे ने कहा कि मैं हल्द्वानी में रामलीला मैदान में लाखों लोगों की जनसभा को संबोधित करने गया था। मैंने किसी समुदाय या धर्म पर टिप्पणी नहीं की, सिर्फ सरकारी नीतियों का विरोध किया। लेकिन मेरे जाने के बाद बीजेपी के लोगों ने उस मंच को ‘शुद्ध’ करने के लिए वहां हवन किया।
जेपी नड्डा का जवाब: बीजेपी अध्यक्ष और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए कहा कि खड़गे जी ने जो कहा वह बेहद दुखद है। बीजेपी ऐसी किसी भी गतिविधि का समर्थन नहीं करती। मैं भरोसा दिलाता हूं कि इस घटना की निश्चित रूप से निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
संसद के बाहर ‘खिलौने’ और ‘चांदी के सिक्के’: अनोखा विरोध प्रदर्शन
संसद भवन के बाहर भी विपक्ष का आक्रामक और अनोखा तेवर देखने को मिला। विपक्षी सांसद संसद के मुख्य द्वार पर सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक रूप से हाथ में ‘बंदर का खिलौना’ लेकर पहुंचे और जमकर नारेबाजी की।
हनुमान मंदिर में 2.15 लाख रुपये दान
समाजवादी पार्टी के सांसदों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान सांसदों से जुटाए गए 2.15 लाख रुपये को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में दान कर दिया।
किरेन रिजिजू का कड़ा तंज: ‘इतिहास में पहली बार चर्चा से भागा विपक्ष’
सत्र के समापन पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि संसदीय इतिहास में यह पहली बार देखने को मिला है कि सरकार सदन में हर मुद्दे पर खुली चर्चा चाहती थी और विपक्ष चर्चा से मुंह छुपाकर भाग रहा था।
