Delimitation Bill Explained: राहुल गांधी और किरेन रिजिजू में क्यों छिड़ी परिसीमन पर बहस? महिला आरक्षण से है सीधा कनेक्शन
Delimitation Bill Explained: आखिर परिसीमन क्या है, जनगणना से इसका क्या संबंध है और 2029 के चुनाव से पहले इसे लेकर इतनी चर्चा क्यों हो रही है?
Delimitation Bill Explained: महिला आरक्षण का कानून पास होने के बावजूद अभी तक महिलाओं को 33% आरक्षण क्यों नहीं मिला? राहुल गांधी और किरेन रिजिजू की बहस के पीछे असली मुद्दा क्या है? अगर परिसीमन बिल पास हो गया तो लोकसभा की सीटों की संख्या कितनी बढ़ सकती है और 2029 के चुनाव में महिलाओं को इसका कितना फायदा मिलेगा? समझिए परिसीमन और महिला आरक्षण का पूरा कनेक्शन आसान भाषा में।
Delimitation Bill Explained: परिसीमन बिल क्या है और महिला आरक्षण से इसका क्या कनेक्शन?
महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर इन दिनों राजनीतिक बहस तेज है। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक इस मुद्दे पर चर्चा हो रही है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बीच भी सोशल मीडिया पर इसे लेकर बहस देखने को मिली।
राहुल गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण बिल तो वर्ष 2023 में ही कांग्रेस के समर्थन से पास हो चुका है। इसके जवाब में किरेन रिजिजू ने कहा कि महिला आरक्षण तभी लागू होगा, जब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होगी।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—जब महिला आरक्षण कानून पहले ही बन चुका है तो फिर परिसीमन की जरूरत क्यों है? और अगर परिसीमन नहीं हुआ तो 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं मिल पाएगा?
आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
सबसे पहले समझिए क्या है महिला आरक्षण कानून?
सितंबर 2023 में संसद ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पारित किया था। इस कानून में लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
यानी लोकसभा और विधानसभा की कुल सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी।
हालांकि यह आरक्षण राज्यसभा और विधान परिषदों में लागू नहीं होगा।
लेकिन इस कानून में एक महत्वपूर्ण शर्त भी रखी गई है। महिला आरक्षण लागू करने से पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
परिसीमन आखिर होता क्या है?
परिसीमन का मतलब आसान भाषा में लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं और सीटों का नए सिरे से निर्धारण करना है।
देश में आबादी में बदलाव के साथ अलग-अलग क्षेत्रों की जनसंख्या भी बदलती रहती है। ऐसे में निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व को नए आंकड़ों के आधार पर तय करने की जरूरत पड़ती है।
यही प्रक्रिया परिसीमन कहलाती है।
परिसीमन का सीधा संबंध जनगणना से भी है, क्योंकि नई जनसंख्या के आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन किया जाता है।
भारत में परिसीमन पर रोक क्यों लगी?
आजादी के बाद जनगणना के आंकड़ों के आधार पर परिसीमन की प्रक्रिया होती रही। लेकिन बाद में दक्षिण भारत के कुछ राज्यों ने इस बात पर आपत्ति जताई कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को परिसीमन के कारण राजनीतिक प्रतिनिधित्व में नुकसान हो सकता है।
इसके बाद संविधान में संशोधन करके परिसीमन पर रोक लगाई गई।
पहले यह रोक 2001 तक थी। बाद में इसे बढ़ाकर 2026 तक कर दिया गया।
यही वजह है कि अब परिसीमन को लेकर फिर से राजनीतिक और संवैधानिक चर्चा तेज हो गई है।
महिला आरक्षण का परिसीमन से सीधा कनेक्शन क्या है?
यही इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम में साफ तौर पर कहा गया है कि महिला आरक्षण परिसीमन के बाद लागू होगा।
मतलब सिर्फ महिला आरक्षण कानून पास हो जाने से महिलाओं को तुरंत 33 प्रतिशत आरक्षण नहीं मिलेगा।
पहले जनगणना के आंकड़े आएंगे, उसके बाद परिसीमन होगा और फिर आरक्षित सीटों का निर्धारण किया जाएगा।
यही कारण है कि सरकार परिसीमन की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने पर जोर दे रही है।
राहुल गांधी और किरेन रिजिजू में क्यों हुई बहस?
इसी मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर राहुल गांधी और किरेन रिजिजू के बीच बहस हुई।
राहुल गांधी की ओर से यह कहा गया कि महिला आरक्षण कानून 2023 में ही पारित हो चुका है। इसके जवाब में रिजिजू ने कहा कि कानून लागू होने के लिए परिसीमन जरूरी है।
यानी दोनों नेताओं के बीच मूल विवाद महिला आरक्षण के कानून के अस्तित्व को लेकर नहीं, बल्कि इसे लागू करने की प्रक्रिया और समयसीमा को लेकर है।
सरकार परिसीमन को लेकर क्या करना चाहती है?
दी गई जानकारी के मुताबिक सरकार ने 131वें संविधान संशोधन विधेयक के जरिए 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का रास्ता खोलने का प्रस्ताव रखा है।
चूंकि यह संविधान में संशोधन से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे पारित करने के लिए संसद में विशेष बहुमत की जरूरत होगी।
बताया गया है कि विधेयक के पहले प्रयास में इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे। हालांकि इसे पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता बताई गई है।
अगर परिसीमन बिल पास हुआ तो क्या बदलेगा?
परिसीमन बिल के पारित होने की स्थिति में कई बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं।
पहला, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन किया जा सकता है।
दूसरा, प्रस्ताव के मुताबिक राज्यों में लोकसभा और विधानसभा की सीटों की संख्या बढ़ सकती है।
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह होगा कि परिसीमन के बाद महिला आरक्षण लागू करने का रास्ता साफ होगा।
दिए गए प्रस्ताव के अनुसार लोकसभा की मौजूदा 543 सीटों की संख्या बढ़कर करीब 850 सीट हो सकती है। इनमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होने का प्रस्ताव बताया गया है।
महिला आरक्षण लागू होने की स्थिति में लोकसभा में करीब 281 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं।

2029 के चुनाव से क्यों जुड़ा है पूरा मामला?
सरकार का तर्क है कि अगर 2026 के बाद होने वाली जनगणना और उसके बाद परिसीमन का इंतजार किया गया, तो महिला आरक्षण कानून होने के बावजूद इसे 2029 के लोकसभा चुनाव से लागू करना मुश्किल हो सकता है।
इसीलिए सरकार जल्द परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है।
हालांकि, इस पूरे मुद्दे में संवैधानिक प्रक्रिया, राजनीतिक सहमति और संसद में आवश्यक बहुमत अहम भूमिका निभाएंगे।
आसान भाषा में समझिए पूरा कनेक्शन
पूरे मामले को अगर एक लाइन में समझें तो कनेक्शन कुछ ऐसा है:
जनगणना → परिसीमन → सीटों का पुनर्गठन → महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण → 33% महिला आरक्षण का लागू होना।
यानी महिला आरक्षण कानून 2023 में पास हो चुका है, लेकिन उसे जमीन पर लागू करने के लिए परिसीमन की प्रक्रिया सबसे अहम कड़ी है।
अब देखना होगा कि परिसीमन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है या नहीं और संसद में प्रस्तावित बदलाव किस रूप में आगे बढ़ते हैं। इसी पर काफी हद तक यह तय होगा कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिल पाता है या नहीं।
