Ranchi Student Protest: AISA से दूरी, CJP का साथ… आखिर किस दिशा में जा रहा रांची का छात्र आंदोलन?
Ranchi Student Protest: JPSC-JSSC भर्ती में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ जारी आंदोलन में छात्रों ने AISA के मार्च से दूरी बनाई, जबकि CJP ने खुलकर समर्थन का ऐलान किया
Ranchi Student Protest: रांची का छात्र आंदोलन अब सिर्फ JPSC-JSSC की मांगों तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसके साथ नया राजनीतिक और युवा समीकरण भी बनता नजर आ रहा है। AISA के विधानसभा मार्च से छात्रों ने दूरी क्यों बनाई और CJP के समर्थन को क्यों स्वीकार किया? आंदोलन की अगली रणनीति क्या है और आखिर छात्रों की मूल मांगें क्या हैं? पूरी कहानी जानने के लिए पढ़िए यह रिपोर्ट।
Ranchi Student Protest: AISA से दूरी, CJP का साथ… आखिर किस दिशा में जा रहा छात्र आंदोलन?
झारखंड की राजधानी रांची में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के खिलाफ चल रहा छात्र आंदोलन अब एक नए मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। जुलाई के आखिरी सप्ताह से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे छात्रों ने एक तरफ पारंपरिक छात्र संगठन AISA के प्रस्तावित विधानसभा मार्च से दूरी बना ली है, तो दूसरी तरफ युवा प्रेशर ग्रुप कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के समर्थन को स्वीकार किया है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर रांची का यह छात्र आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ रहा है? क्या छात्र किसी राजनीतिक संगठन के साथ जाने के बजाय अपने आंदोलन को स्वतंत्र रखना चाहते हैं या फिर आंदोलन में एक नया युवा समीकरण तैयार हो रहा है?
7 अगस्त के AISA मार्च से छात्रों ने बनाई दूरी
रांची में JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच के बैनर तले आंदोलन कर रहे छात्रों ने साफ कर दिया है कि 7 अगस्त को AISA की ओर से प्रस्तावित विधानसभा मार्च से उनका कोई संबंध नहीं है।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन के दौरान चर्चा में आईं AISA नेता नेहा बोरा ने रांची में विधानसभा मार्च का आह्वान किया था। लेकिन मूल आंदोलन से जुड़े छात्र प्रतिनिधियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खुद को इस मार्च से अलग कर लिया।
छात्रों का कहना है कि उनका आंदोलन स्वतंत्र है और किसी बाहरी राजनीतिक या छात्र संगठन के नेतृत्व में नहीं चल रहा। उन्होंने अपने स्तर पर 10 अगस्त को विधानसभा घेराव का कार्यक्रम तय किया है।
AISA से दूरी की क्या है वजह?
आंदोलनकारी छात्रों के मुताबिक वे किसी स्थापित वामपंथी या दक्षिणपंथी छात्र संगठन का राजनीतिक टैग नहीं लेना चाहते। उनका कहना है कि JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच की लड़ाई सीधे तौर पर अभ्यर्थियों के भविष्य और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़ी है।
छात्रों को यह भी आशंका है कि अगर किसी राजनीतिक छात्र संगठन को आंदोलन का चेहरा बनाया गया तो सरकार इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित आंदोलन बताकर उनकी मूल मांगों को नजरअंदाज कर सकती है।
इसी वजह से आंदोलनकारी अपने मंच और नेतृत्व को स्वतंत्र बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं।
अब CJP की एंट्री से बदला समीकरण
एक तरफ जहां छात्रों ने AISA से दूरी बनाई है, वहीं दूसरी तरफ कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने रांची के आंदोलन को खुला समर्थन दिया है।
CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आंदोलनकारी छात्र नेताओं से बातचीत कर उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिया है। CJP की ओर से यह भी कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर संगठन के लोग झारखंड पहुंचकर आंदोलन में छात्रों का साथ देंगे।
यही वजह है कि अब रांची के छात्र आंदोलन में पारंपरिक छात्र राजनीति के बजाय नए तरह के युवा प्रेशर ग्रुप की भूमिका भी चर्चा में आ गई है।
छात्रों की असली लड़ाई क्या है?
राजनीतिक समीकरणों से अलग देखें तो छात्रों की मुख्य लड़ाई JPSC और JSSC भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर है।
प्रदर्शनकारी 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराने की मांग कर रहे हैं। छात्रों ने कटऑफ में कथित गड़बड़ी, OMR शीट विवाद और TDPL एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
इसके अलावा आंदोलनकारी राज्य की CID जांच से संतुष्ट नहीं हैं। वे मामले की CBI जांच या राज्य से बाहर के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के पैनल से स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं।
OMR में ‘Not Attempted’ का विकल्प भी चाहते हैं छात्र
छात्रों की मांग सिर्फ परीक्षा रद्द कराने तक सीमित नहीं है। वे भविष्य की परीक्षाओं में OMR शीट से छेड़छाड़ की आशंका को खत्म करने के लिए ‘Not Attempted’ का पांचवां विकल्प जोड़ने की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा JSSC की लंबित परीक्षाओं के लिए समयबद्ध वार्षिक कैलेंडर जारी करने और पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा है।

11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से सरकार से वार्ता की तैयारी
JPSC-JSSC रिफॉर्म मंच ने सरकार के साथ सीधे संवाद के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल भी तय किया है। इसमें आठ छात्र प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है, जबकि पत्रकारों और कानूनविदों को अभिभावक एवं मार्गदर्शक की भूमिका में रखा गया है।
छात्रों का कहना है कि सरकार से बातचीत के दौरान उनके मूल मुद्दों से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
अब 10 अगस्त पर टिकी नजरें
फिलहाल रांची के छात्र आंदोलन की दिशा काफी हद तक 10 अगस्त के प्रस्तावित विधानसभा घेराव से तय होगी। AISA के 7 अगस्त के मार्च से दूरी और CJP के समर्थन के बाद आंदोलन ने एक अलग रूप जरूर ले लिया है।
एक तरफ छात्र खुद को किसी राजनीतिक संगठन के झंडे से दूर रखकर अपने मुद्दों पर केंद्रित रखने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ CJP जैसे नए युवा प्रेशर ग्रुप का समर्थन आंदोलन को व्यापक मंच देने की कोशिश करता दिख रहा है।
अब देखना होगा कि सरकार छात्रों के साथ बातचीत का रास्ता अपनाती है या आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप लेता है। फिलहाल छात्रों का संदेश साफ है लड़ाई किसी संगठन के झंडे की नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, निष्पक्ष जांच और अपने भविष्य के अधिकार की है।
