Bilaspur Malaria Death: मलेरिया ने ली 37 साल की महिला की जान, कोटा में लगातार बढ़ रहे मामलों ने बढ़ाई चिंता
Bilaspur Malaria Death: कोटा विकासखंड की 37 वर्षीय आदिवासी महिला ने सिम्स में इलाज के दौरान दम तोड़ा, जिले में 6 सक्रिय मरीजों के बीच बढ़ी चिंता
Bilaspur Malaria Death: बिलासपुर के कोटा इलाके में मलेरिया ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। 37 वर्षीय आदिवासी महिला की इलाज के दौरान मौत के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर ग्रामीण इलाकों में मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां कितनी कारगर हैं? क्षेत्र में कितने मरीज सक्रिय हैं और संक्रमण का खतरा क्यों बढ़ रहा है? जानिए पूरी खबर।
Bilaspur Malaria Death: कोटा में मलेरिया का कहर, इलाज के दौरान आदिवासी महिला की मौत
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में मलेरिया ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। कोटा विकासखंड के औरापानी गांव की रहने वाली 37 वर्षीय आदिवासी महिला रेखा बैगा की मलेरिया से मौत हो गई है। महिला का पहले स्थानीय स्तर पर इलाज किया गया, लेकिन हालत गंभीर होने के बाद उसे बिलासपुर के सिम्स अस्पताल रेफर किया गया। यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
महिला की मौत के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में मलेरिया नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल उठने लगे हैं। खासकर कोटा क्षेत्र में लगातार नए मामले सामने आने की बात कही जा रही है, जिससे संक्रमण के और फैलने की आशंका बढ़ गई है।
पहले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ इलाज
जानकारी के मुताबिक, रेखा बैगा की तबीयत बिगड़ने के बाद उसे गनियार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था। यहां उसका इलाज किया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे बिलासपुर के सिम्स अस्पताल रेफर कर दिया।
सिम्स में महिला का इलाज जारी था, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हो सका और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। मलेरिया से मौत की इस घटना ने खासकर ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बीमारी की रोकथाम को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
कोटा में लगातार सामने आ रहे मलेरिया के मामले
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, बिलासपुर जिले में फिलहाल मलेरिया के 6 सक्रिय मरीज हैं। हालांकि कोटा विकासखंड में लगातार नए मरीज मिलने की जानकारी सामने आ रही है।
ग्रामीण इलाकों में मलेरिया का संक्रमण तेजी से फैलने की आशंका इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दूरस्थ क्षेत्रों में समय पर जांच और इलाज मिलना एक बड़ी चुनौती हो सकती है। ऐसे में एक मरीज की मौत के बाद प्रभावित इलाकों में निगरानी और बचाव गतिविधियों को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर उठे सवाल
रेखा बैगा की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने मलेरिया नियंत्रण को लेकर स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में मलेरिया के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन बीमारी की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयास पर्याप्त नजर नहीं आ रहे।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रभावित गांवों में मलेरिया की जांच, संक्रमित मरीजों की पहचान और बीमारी की रोकथाम के लिए किस स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है।

निगरानी और बचाव गतिविधियां तेज करने का दावा
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि प्रभावित इलाकों में निगरानी और बचाव संबंधी गतिविधियों को तेज किया जा रहा है। विभाग की ओर से मरीजों की पहचान और संक्रमण की स्थिति पर नजर रखने की बात कही गई है।
हालांकि, कोटा क्षेत्र में नए मरीजों की मौजूदगी और अब एक महिला की मौत के बाद यह जरूरी हो गया है कि प्रभावित इलाकों में मलेरिया की जांच और रोकथाम को और मजबूत किया जाए।
ग्रामीण इलाकों में बढ़ी चिंता
मलेरिया के मामले खासकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। समय पर बीमारी की पहचान और उपचार नहीं मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।
रेखा बैगा की मौत के बाद अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर हैं। क्या प्रभावित गांवों में विशेष जांच अभियान चलाया जाएगा? क्या मलेरिया प्रभावित इलाकों में रोकथाम के उपाय बढ़ाए जाएंगे? और क्या जिले में सक्रिय मरीजों की संख्या को जल्द नियंत्रित किया जा सकेगा? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में सामने आएंगे।
