जैविक खेती की खरीद पर सवाल: खिलौने की कैटेगरी में निकला खाद का टेंडर, करोड़ों की खरीद जांच के घेरे में
रायपुर: छत्तीसगढ़ में संचालित परंपरागत कृषि विकास योजना और जैविक खेती मिशन के तहत की जा रही सामग्री खरीद को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2026-27 के लिए जैविक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभिन्न जिलों को करीब 10 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि अब आरोप लग रहे हैं कि खरीद प्रक्रिया के दौरान कई जिलों में बाजार मूल्य से काफी अधिक कीमत पर सामग्री खरीदी गई और टेंडर प्रक्रिया में भी पारदर्शिता नहीं बरती गई।
महंगे दाम पर खरीद के आरोप
जानकारी के अनुसार जैविक खेती में उपयोग होने वाली कुछ सामग्रियों की खरीद बाजार और अन्य सरकारी एजेंसियों की तुलना में कहीं अधिक दरों पर की गई। आरोप है कि जिन उत्पादों की खरीद सामान्यतः कम कीमत पर होती है, उन्हें GeM पोर्टल के माध्यम से अधिक दरों पर खरीदा गया। इससे सरकारी राशि के उपयोग पर सवाल उठने लगे हैं।
टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप
सूत्रों के मुताबिक कई जिलों में टेंडर जारी करते समय उत्पादों की वास्तविक श्रेणी (कैटेगरी) के बजाय अन्य श्रेणियों का उपयोग किया गया। आरोप है कि इससे संबंधित व्यवसायियों को टेंडर की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी और प्रतिस्पर्धा सीमित हो गई। इस प्रक्रिया के कारण केवल कुछ चुनिंदा कंपनियों को भाग लेने का अवसर मिलने की बात भी सामने आई है।
‘बंच बिड’ के जरिए सीमित हुई प्रतिस्पर्धा
खरीद प्रक्रिया में कई प्रकार की सामग्रियों को एक साथ शामिल कर बंच बिड जारी किए जाने का भी आरोप है। इससे केवल वही कंपनियां पात्र बन सकीं जिनके पास सभी उत्पाद उपलब्ध थे। छोटे आपूर्तिकर्ता और स्थानीय विक्रेता इस प्रक्रिया से बाहर हो गए, जिससे प्रतिस्पर्धा कम होने की आशंका जताई जा रही है।
कई जिलों में एक जैसी कंपनियों को मिला काम
दंतेवाड़ा, कोंडागांव और कोरबा समेत कई जिलों में सामग्री आपूर्ति का जिम्मा सीमित संख्या में कंपनियों को दिए जाने पर भी सवाल उठे हैं। आरोप है कि कुछ जिलों में करोड़ों रुपये के कार्यादेश एक ही समूह की कंपनियों को मिले हैं। इनमें से एक कंपनी का नाम पहले भी अन्य मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई के कारण चर्चा में रह चुका है।
जिला स्तर पर दबाव की भी चर्चा
सूत्रों का दावा है कि कुछ जिलों के अधिकारियों ने अनौपचारिक तौर पर यह संकेत दिया है कि खरीद प्रक्रिया को लेकर उन्हें उच्च स्तर से निर्देश मिले थे। हालांकि इस संबंध में किसी अधिकारी ने आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
अब पारदर्शी जांच की उठी मांग
मामले के सामने आने के बाद खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और वास्तविक कीमतों, टेंडर प्रक्रिया तथा कंपनियों के चयन की समीक्षा करने की मांग उठने लगी है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारियों और आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका की भी जांच हो सकती है। फिलहाल संबंधित विभाग की ओर से इस पूरे मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
