लोकसभा से पास हुआ नया टैक्स संशोधन बिल 2026, विदेशी निवेश और छोटे निवेशकों को मिलेगी बड़ी राहत

Taxation Amendment Bill 2026

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भारत को वैश्विक निवेश, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए ‘Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026’ लोकसभा से पारित करा दिया है। सरकार का दावा है कि यह संशोधन केवल टैक्स नियमों में बदलाव नहीं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और विदेशी निवेश को गति देने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। नए प्रावधानों का लाभ इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग, डेटा सेंटर, डायमंड ट्रेड, फंड मैनेजमेंट और बिजनेस ट्रस्ट (REITs/InvITs) जैसे कई क्षेत्रों को मिलेगा।

इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगी नई रफ्तार

सरकार ने भारत को मोबाइल, लैपटॉप, सर्वर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए टैक्स व्यवस्था को सरल बनाया है। अब भारतीय इकाइयों के लिए कस्टम बॉन्डेड वेयरहाउस में पार्ट्स रखने वाली विदेशी कंपनियों पर लागू 2 प्रतिशत प्रिजम्प्टिव टैक्स समाप्त कर दिया जाएगा। इसके साथ ही इस व्यवस्था को 15 वर्षों तक टैक्स राहत प्रदान की जाएगी, जिससे विदेशी कंपनियों का निवेश बढ़ने की संभावना है।

विदेशी कंपनियों को लंबी अवधि की टैक्स राहत

इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से जुड़ी भारतीय कंपनियों को मशीनरी और टूलिंग उपलब्ध कराने वाली विदेशी कंपनियों के लिए टैक्स छूट की अवधि भी बढ़ा दी गई है। पहले यह राहत पांच वर्षों तक सीमित थी, जिसे अब वित्त वर्ष 2040-41 तक यानी 15 वर्षों के लिए लागू किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे वैश्विक कंपनियां भारत में दीर्घकालिक निवेश के लिए अधिक आकर्षित होंगी।

REIT और InvIT निवेशकों को मिलेगा फायदा

नए संशोधन में बिजनेस ट्रस्ट (REITs और InvITs) में निवेश करने वाले छोटे निवेशकों को राहत दी गई है। पहले यदि ऑपरेटिंग कंपनी नई टैक्स व्यवस्था अपनाती थी तो निवेशकों को मिलने वाला डिविडेंड टैक्स छूट के दायरे से बाहर हो जाता था। अब संशोधन के बाद यूनिट धारकों को मिलने वाला लाभांश फिर से टैक्स राहत के दायरे में रहेगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त कर का भार निवेशकों पर नहीं, बल्कि कंपनी स्तर पर समायोजित किया जाएगा।

डेटा सेंटर और AI इंफ्रास्ट्रक्चर को मिलेगा बढ़ावा

देश में बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर और AI आधारित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए कई प्रक्रियाओं को आसान बनाया गया है। विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं और भारतीय डेटा सेंटर कंपनियों को अब अलग-अलग सरकारी मंजूरियों की आवश्यकता नहीं होगी। साथ ही कंपनियों को लीज पर ली गई जमीन या भवन में भी आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने की अनुमति मिलेगी, जिससे निवेश लागत कम होगी और परियोजनाओं का विस्तार तेज़ी से हो सकेगा।

read more : डिप्टी CM साव का बड़ा ऐलान: 6 नए जिलों में होंगे जिला खेल अधिकारी, छत्तीसगढ़ में शुरू होगी हॉकी लीग

डायमंड ट्रेड सेक्टर को भी टैक्स राहत

मुंबई और सूरत के स्पेशल नोटिफाइड ज़ोन (SNZ) में कच्चे हीरों के व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने खरीद-बिक्री पर भी टैक्स छूट का दायरा बढ़ा दिया है। यह राहत केवल विदेशी माइनिंग कंपनियों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि उनके ब्रोकर्स, एग्रीगेटर्स, साइटहोल्डर्स और ऑक्शन हाउस भी इसका लाभ उठा सकेंगे। इससे भारत को वैश्विक डायमंड ट्रेडिंग हब बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।

फंड मैनेजमेंट और विदेशी निवेश होगा आसान

संशोधन के तहत विदेशी निवेश फंडों के संचालन से जुड़ी कई जटिल शर्तों को भी सरल किया गया है। पहले जहां विदेशी फंडों पर लागू शर्तों की संख्या अधिक थी, वहीं अब उन्हें काफी कम कर दिया गया है। इससे भारतीय फंड मैनेजर और वैश्विक निवेश संस्थाएं भारत तथा GIFT City जैसे वित्तीय केंद्रों से अपना संचालन अधिक सहजता से कर सकेंगी।

निवेश और कारोबार के माहौल को मिलेगा लाभ

सरकार का कहना है कि Taxation Amendment Bill 2026 से टैक्स प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी, निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग, डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर तथा डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति और मजबूत कर सकेगा। नए प्रावधानों से विदेशी निवेश आकर्षित होने के साथ-साथ घरेलू उद्योगों और छोटे निवेशकों को भी दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

Youthwings