नीली से भगवा हुई भारतीय हॉकी टीम की जर्सी! प्रियंका गांधी ने उठाए बड़े सवाल, हॉकी इंडिया ने दी सफाई
भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम की जर्सी का रंग नीले से बदलकर भगवा (ऑरेंज) किए जाने के फैसले ने राजनीतिक और खेल जगत में बहस छेड़ दी है। हॉकी इंडिया के इस फैसले पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने तीखी प्रतिक्रिया दी, जबकि टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा ने भी सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी जाहिर की। दूसरी ओर हॉकी इंडिया ने साफ किया कि यह फैसला किसी राजनीतिक कारण से नहीं, बल्कि खिलाड़ियों और तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया है।
प्रियंका गांधी ने फैसले पर उठाए सवाल
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि देश की जनता हर बदलाव को देख और समझ रही है। उन्होंने कहा कि चाहे जर्सी का रंग बदला जाए या शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से इतिहास बदलने की कोशिश हो, लोग सब कुछ समझ रहे हैं। उन्होंने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन का भी जिक्र करते हुए कहा कि वहां उठी आवाज पूरे देश की भावना को दर्शाती है। उनके मुताबिक भारत की आजादी सत्य और अहिंसा के मूल्यों पर आधारित रही है और देश की पहचान भाईचारा, प्रेम तथा एकता से जुड़ी है। राहुल गांधी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए घायल युवक का उल्लेख करते हुए प्रियंका गांधी ने सवाल किया कि उसके शरीर पर मिले छर्रे आखिर कहां से आए।
पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा ने जताई नाराजगी
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान वीरेन रस्किन्हा ने नई जर्सी को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि हॉकी इंडिया ने कई सकारात्मक कार्य किए हैं, लेकिन जर्सी बदलने का फैसला उन्हें निराशाजनक लगा। उन्होंने कहा कि भारतीय हॉकी की पहचान लंबे समय से नीली जर्सी रही है और उन्होंने स्वयं कई वर्षों तक उसी रंग की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व किया है। उनके अनुसार, अधिकांश प्रशंसक भी टीम को नीले रंग में ही देखना पसंद करते हैं।
हॉकी इंडिया ने तकनीकी वजह बताई
विवाद बढ़ने के बाद हॉकी इंडिया ने स्पष्ट किया कि जर्सी का रंग बदलने का फैसला पूरी तरह तकनीकी कारणों से लिया गया है। संस्था के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय हॉकी मैच नीली सतह वाले मैदानों पर खेले जाते हैं, जिससे नीली जर्सी पहनने वाले खिलाड़ियों की पहचान करने में कोचिंग स्टाफ और दर्शकों को कठिनाई होती थी। इसी वजह से खिलाड़ियों, कप्तानों और सपोर्ट स्टाफ से चर्चा के बाद पीले और भगवा रंग पर विचार किया गया और अंततः भगवा रंग को चुना गया।
पहले भी बदली जा चुकी है टीम की जर्सी
हॉकी इंडिया ने यह भी कहा कि भारतीय टीम की जर्सी पहले भी कई बार बदली जा चुकी है। वर्ष 2014 विश्व कप में टीम ने पीली जर्सी पहनी थी, जबकि 2018 विश्व कप में आसमानी नीले रंग की जर्सी का इस्तेमाल किया गया था। इसलिए मौजूदा बदलाव कोई पहली बार नहीं है।
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नई जर्सी की डिजाइन में भारतीय संस्कृति की झलक
हॉकी इंडिया के मुताबिक नई भगवा जर्सी साहस, बलिदान और विजय का प्रतीक है। जर्सी पर बना मंडाला डिजाइन भारतीय सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है, जबकि नेवी ब्लू रंग के हिस्से अशोक चक्र से प्रेरित हैं। जर्सी के सामने देवनागरी लिपि में “इंडिया” लिखा गया है, जिसे भारतीय भाषाई और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बताया गया है।
दिलीप तिर्की बोले- खिलाड़ियों को पसंद नहीं आई तो बदली जाएगी
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप कुमार तिर्की ने विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नई जर्सी का चयन खिलाड़ियों, कप्तानों, कोच और सपोर्ट स्टाफ की राय के आधार पर किया गया है। उन्होंने कहा कि यदि विश्व कप के बाद खिलाड़ियों को यह जर्सी उपयुक्त नहीं लगती है, तो भविष्य में इसे बदलने पर भी विचार किया जा सकता है।
अगले महीने विश्व कप में दिखेगी नई जर्सी
भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम अगले महीने 15 से 30 अगस्त के बीच नीदरलैंड्स और बेल्जियम में आयोजित एफआईएच हॉकी वर्ल्ड कप में इसी नई भगवा जर्सी में मैदान पर उतरेंगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह बदलाव खेल तक सीमित रहता है या राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहती है।
