55 गांव… 10 हजार उपभोक्ता और सिर्फ एक कर्मचारी! ऐसी चल रही बिजली व्यवस्था
बस्तर जिले के नानगुर विद्युत वितरण केंद्र में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण बिजली व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इस केंद्र के अंतर्गत आने वाले 55 गांवों और करीब 213 किलोमीटर लंबी विद्युत लाइन की जिम्मेदारी फिलहाल केवल एक संविदाकर्मी और जरूरत पड़ने पर बुलाए जाने वाले कुछ आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे चल रही है। जबकि इस क्षेत्र में लगभग 10 हजार उपभोक्ता बिजली आपूर्ति पर निर्भर हैं।
बारिश और आंधी में घंटों बंद रहती है बिजली
मानसून और तेज हवाओं के दौरान बिजली लाइनों में लगातार फॉल्ट आने से ग्रामीणों को लंबे समय तक बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। सीमित स्टाफ होने की वजह से खराबी दूर करने में काफी समय लग जाता है। कई बार कर्मचारियों को पर्याप्त संसाधनों और सुरक्षा उपकरणों के बिना ही जोखिम उठाकर मरम्मत कार्य करना पड़ता है।
साढ़े तीन साल बाद भी नहीं भरे गए रिक्त पद
ग्रामीणों का कहना है कि ट्रांसफार्मर खराब होने या तार टूटने जैसी समस्याओं के समाधान में एक-दो दिन तक लग जाते हैं। उल्लेखनीय है कि करीब साढ़े तीन वर्ष पहले नानगुर को विद्युत वितरण केंद्र का दर्जा मिला था, लेकिन अब तक यहां नियमित कनिष्ठ अभियंता और तकनीकी कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं की गई है। बारिश के मौसम में प्रतिदिन बड़ी संख्या में फॉल्ट की शिकायतें दर्ज हो रही हैं, जिनका समय पर निराकरण संभव नहीं हो पा रहा है।
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जर्जर भवन और लाइनमैन का अभाव
विद्युत वितरण केंद्र का कार्यालय भवन भी बदहाल स्थिति में है। बारिश के दौरान भवन के भीतर पानी भर जाता है और उपभोक्ताओं के बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा पूरे क्षेत्र में नियमित लाइनमैन की तैनाती भी नहीं है, जिससे तकनीकी समस्याओं का समाधान और अधिक प्रभावित हो रहा है।
उच्च अधिकारियों को भेजी गई रिक्त पदों की जानकारी
विद्युत विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रिक्त पदों का प्रस्ताव मुख्यालय को भेजा जा चुका है। मुख्यालय से स्वीकृति मिलने के बाद आवश्यक अधिकारी और कर्मचारी पदस्थ किए जाएंगे, जिससे बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
