EXCLUSIVE: छत्तीसगढ़ में कहां-कहां चला बुलडोजर? जानिए किस जिले में कितने घर टूटे, पूरी रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ बुलडोजर कार्रवाई

रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों अतिक्रमण हटाने के नाम पर प्रशासन का बुलडोजर लगातार चल रहा है। रायपुर से लेकर अंबिकापुर, बिलासपुर, भिलाई, धमतरी और अन्य जिलों तक सरकारी जमीन, वन भूमि और अवैध प्लॉटिंग पर कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान भू-माफियाओं और अवैध कब्जों के खिलाफ है, लेकिन जिन परिवारों के आशियाने टूटे हैं, उनके लिए यह कार्रवाई जिंदगी की सबसे बड़ी त्रासदी बन गई है। सबसे ज्यादा सवाल रायपुर के नकटी गांव की कार्रवाई पर उठ रहे हैं, जहां कई परिवारों के मकान जमींदोज कर दिए गए।

नकटी गांव बना सबसे बड़ा विवाद

रायपुर जिले के नकटी गांव में बुलडोजर कार्रवाई के दौरान दर्जनों मकान तोड़े गए। प्रशासन का दावा है कि जमीन सरकारी थी और यहां भविष्य में सार्वजनिक परियोजना विकसित की जानी है। दूसरी ओर ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया और कई ऐसे मकान भी टूट गए जो सरकारी योजनाओं के तहत बने थे।

यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—यदि किसी परिवार को सरकार ने पहले आवास योजना का लाभ देकर घर बनवाया था, तो बाद में उसी घर को तोड़ने की नौबत क्यों आई? क्या निर्माण के समय जमीन का सत्यापन नहीं हुआ था? यदि गलती प्रशासनिक थी, तो उसकी कीमत गरीब परिवार क्यों चुकाएं?

तूता गांव में नोटिस से बढ़ी चिंता

नकटी के बाद तूता गांव में कारण बताओ नोटिस जारी होने से ग्रामीणों में डर का माहौल है। हालांकि NRDA ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल केवल नोटिस जारी किए गए हैं और किसी प्रकार की बेदखली या विस्थापन की कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। इसके बावजूद लोग आशंकित हैं कि कहीं उनके गांव में भी नकटी जैसी स्थिति न बन जाए।

अंबिकापुर में वन भूमि से हटाए गए कब्जे

सरगुजा जिले के अंबिकापुर में वन विभाग और जिला प्रशासन ने आरक्षित वन भूमि पर बने अवैध निर्माणों को हटाने के लिए अभियान चलाया। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह कानून के तहत की गई, जबकि प्रभावित परिवार पुनर्वास और मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

छत्तीसगढ़ बुलडोजर कार्रवाई

बिलासपुर में अवैध प्लॉटिंग पर चला बुलडोजर

बिलासपुर में नगर निगम ने बिना अनुमति विकसित की जा रही कॉलोनियों के खिलाफ अभियान चलाया। कई स्थानों पर बाउंड्री वॉल, सड़कें और अन्य निर्माण ध्वस्त किए गए। प्रशासन ने इसे अवैध कॉलोनाइजर्स के खिलाफ कार्रवाई बताया ताकि भविष्य में खरीदारों के साथ धोखाधड़ी न हो।

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भिलाई-दुर्ग में भी कार्रवाई जारी

भिलाई और दुर्ग में सरकारी क्वार्टरों से अवैध कब्जे हटाए गए। इसके अलावा कई जगहों पर व्यावसायिक निर्माण और सरकारी जमीन पर किए गए अतिक्रमण को भी हटाया गया। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति को अतिक्रमण मुक्त कराना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है।

धमतरी सहित अन्य जिलों में भी अभियान

धमतरी और अन्य जिलों में चारागाह, गोठान और सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। कई जगह दीवारें, फेंसिंग और अस्थायी निर्माण हटाए गए। प्रशासन का कहना है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा।

सबसे बड़ा सवाल: बुलडोजर से पहले व्यवस्था क्यों नहीं?

अतिक्रमण हटाना कानून का हिस्सा हो सकता है, लेकिन हर कार्रवाई के बाद एक सवाल जरूर उठता है—क्या प्रशासन समय रहते अवैध कब्जे रोकने में सफल रहा?

यदि किसी जमीन पर वर्षों तक निर्माण होता रहा, बिजली-पानी के कनेक्शन मिले, सरकारी योजनाओं का लाभ मिला और प्रशासन चुप रहा, तो आखिर पूरी जिम्मेदारी केवल उस परिवार की कैसे हो सकती है? बुलडोजर चलने के बाद गरीब परिवार बेघर हो जाते हैं, लेकिन उन अधिकारियों की जवाबदेही तय होती हुई कम ही दिखाई देती है जिनकी निगरानी में यह सब हुआ।

सियासत भी तेज

इन कार्रवाइयों को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष सरकार पर गरीबों के साथ अन्याय का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और सरकारी जमीनों को कब्जामुक्त कराना आवश्यक है। सरकार ने यह भी कहा है कि पात्र परिवारों के पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की जाएगी।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई केवल बुलडोजर तक सीमित रहेगी, या फिर इसके साथ जवाबदेही, पुनर्वास और मानवीय संवेदनाओं को भी समान महत्व मिलेगा।

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