अलीगंज अग्निकांड: 2016 में ध्वस्तीकरण का आदेश, फिर कैसे बच गया भवन? 4 अधिकारी सस्पेंड
लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में हुए भीषण अलीगंज अग्निकांड के बाद अब हादसे से जुड़े भवन के पुराने रिकॉर्ड और प्रशासनिक कार्रवाई चर्चा का विषय बन गए हैं। जांच के दौरान सामने आया है कि जिस भवन में यह दर्दनाक घटना हुई, उसके खिलाफ वर्ष 2016 में अवैध निर्माण के आरोप में ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया था। हालांकि, कुछ ही समय बाद यह आदेश निरस्त कर दिया गया था, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
1980 में हुआ था भवन का आवंटन
जानकारी के अनुसार, अलीगंज योजना के सेक्टर-डी स्थित भवन संख्या एमएस/102/डी का आवंटन वर्ष 1980 में लॉटरी प्रणाली के माध्यम से किया गया था। बाद में निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद भवन का कब्जा आवंटी को सौंप दिया गया। समय के साथ संपत्ति का स्वामित्व बदलता गया और वर्ष 2014 में वर्तमान मालिकों के नाम पर नामांतरण की प्रक्रिया भी पूरी कर दी गई। इसी दौरान भवन का मानचित्र आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत किया गया था।
अवैध निर्माण पर हुई थी कार्रवाई
प्राधिकरण की जांच में भवन में अनधिकृत निर्माण की शिकायत सामने आने के बाद संबंधित मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। जांच पूरी होने के बाद मई 2016 में भवन के अवैध हिस्से को हटाने के लिए ध्वस्तीकरण आदेश जारी किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि लगभग दो महीने के भीतर ही उक्त आदेश वापस ले लिया गया। अब इस फैसले को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

अलीगंज अग्निकांड के बाद बढ़ी जांच की रफ्तार
अलीगंज अग्निकांड घटना के बाद प्रशासन और पुलिस ने जांच तेज कर दी है। हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने देर रात चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि शासन ने लापरवाही के आरोप में चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
प्रशासनिक निर्णयों पर उठ रहे सवाल
अलीगंज अग्निकांड के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि भवन के खिलाफ पहले से कार्रवाई की गई थी, तो ध्वस्तीकरण आदेश को निरस्त क्यों किया गया। जांच एजेंसियां अब भवन की स्वीकृतियों, निर्माण संबंधी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा कर रही हैं। माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं।
read more: 15 मौतों से दहला यूपी, घटनास्थल पहुंचे CM योगी, अफसरों को लगाई फटकार
