मध्य प्रदेश के स्कूलों में ई-अटेंडेंस की खामियों से परेशान शिक्षक, लोकेशन और फेस वेरिफिकेशन में आ रही दिक्कत
16 जून से लागू हुआ ई-अटेंडेंस, कई जिलों के शिक्षकों ने लोकेशन ट्रैकिंग, फेस मैचिंग और सर्वर की समस्याओं को लेकर दर्ज कराई शिकायत
भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दिया गया है। 16 जून से स्कूल खुलने के बाद यह व्यवस्था लागू हुई, लेकिन इसकी तकनीकी खामियों ने शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भोपाल, रायसेन, सीहोर सहित कई जिलों के शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस एप की कमियों की शिकायत दर्ज कराई है।
शिक्षकों के अनुसार, ‘हमारे शिक्षक’ एप के जरिए अटेंडेंस लेने में कई तकनीकी दिक्कतें आ रही हैं। शिक्षकों के स्कूल पहुंचने के बावजूद एप सही लोकेशन नहीं ले रहा है और कई किलोमीटर दूर का लोकेशन बता रहा है। फेस वेरिफिकेशन में भी परेशानी हो रही है और लोकेशन ट्रैकिंग में त्रुटि सामने आई है।
इसी तरह की समस्या पहले भी उठ चुकी है। 27 शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि कई शिक्षकों के पास अच्छे स्मार्टफोन नहीं हैं, डेटा पैक खरीदना महंगा पड़ता है, ग्रामीण इलाकों में नेटवर्क की समस्या है और एप का सर्वर भी धीमा चलता है। शिक्षकों का आरोप है कि जो लोग एप पर अटेंडेंस नहीं मार पाते, उन्हें विभागीय अधिकारी सैलरी कटौती की धमकी देते हैं।
गौरतलब है कि पहले भी ई-अटेंडेंस को लेकर विवाद हो चुका है। रीवा जिले में 1500 से अधिक शिक्षकों को अटेंडेंस न मारने पर नोटिस भेजे गए थे, जिनमें तीन मृत शिक्षक भी शामिल थे। विभाग ने इसे डेटा अपडेट न होने की तकनीकी त्रुटि बताया था।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि सिस्टम की खामियों का खामियाजा शिक्षकों को नहीं भुगतना चाहिए। मांग की गई है कि या तो बायोमेट्रिक मशीन से अटेंडेंस लिया जाए या पुरानी रजिस्टर व्यवस्था बहाल की जाए। मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। फिलहाल शिक्षकों का कहना है कि जब तक एप की तकनीकी खामियां दूर नहीं हो जातीं, तब तक इस व्यवस्था को अनिवार्य नहीं किया जाना चाहिए।
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