पाकिस्तान के खिलाफ PoK में बगावत, प्रदर्शनकारियों ने शहबाज-आसिम मुनीर को बताया ‘कलादम’
पाकिस्तानी सेना और क्रूर हुकूमत के खिलाफ उठी आवाज, अवामी एक्शन कमेटी के बीच मतभेद
PoK protests against Pakistan : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हालात विस्फोटक हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, PoK के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौड़ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को ‘कलादम’ यानी आतंकी बताते हुए उनकी खिल्ली उड़ाई। इस हिंसक आंदोलन में अब तक 53 लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी शासन के खिलाफ रावलाकोट में डटे हुए हैं। यह PoK protests against Pakistan 2026 पिछले मंगलवार से तेज हो गया है।
पूरे इलाके में पाकिस्तान और चीन के अवैध कब्जे के खिलाफ जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन हो रहे हैं। अवामी एक्शन कमेटी के नेता अमजद खान अधिवक्ता ने कहा कि पहली बार ऐसा हुआ है जब प्रदर्शनकारियों का साथ जम्मू, गिलगित-बाल्टिस्तान और लद्दाख दे रहा है। यह सीमा पार कश्मीरियों की एकजुटता का प्रतीक है।
क्यों उबला PoK में जनता का गुस्सा?
Pakistan Occupied Kashmir uprising में प्रदर्शनकारियों की दो सबसे प्रमुख मांगों पर पाकिस्तान सरकार के साथ पेंच फंसा हुआ है:
- PoK के अंदर 12 कथित शरणार्थी सीटों को खत्म करने की मांग, जिसे स्थानीय आबादी ‘जानता’ के नाम से जानती है।
- PoK के निर्वाचित नेताओं के शपथ ग्रहण से जुड़ी वफादारी की शर्तों में बदलाव की मांग।
यह साफ है कि Shahbaz Sharif Asim Munir terrorist declaration से प्रदर्शनकारी उस पाकिस्तानी तंत्र के खिलाफ हैं, जो इन मांगों को मानने को तैयार नहीं है।
आंदोलन के तरीके पर नेताओं में मतभेद, एक धड़ा ‘आर-पार’ का आमादा
अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं के बीच इस आंदोलन के तरीके को लेकर कुछ आपसी मतभेद साफ नजर आ रहे हैं।
- सरदार अमान खान और ख्वाजा मेहरान खुलेआम बगावती रुख अपनाए हुए हैं। उनका कहना है कि अब पाकिस्तानी सेना के खिलाफ ‘आर-पार’ की लड़ाई लड़ी जाएगी। वे पीओके की पूर्ण आजादी की मांग कर रहे हैं।
- इसके विपरीत, उमर नज़ीर और शौकत नवाज मीर पाकिस्तानी हुकूमत के साथ नर्म रुख अपना कर अपनी मांगों को लेकर बातचीत की कोशिश कर रहे हैं।
यह मतभेद को और जटिल बना रहा है, फिर भी सड़कों पर प्रदर्शन जारी है।
रावलाकोट में पाकिस्तानी सेना की बर्बरता, 53 जानें गईं
पिछले मंगलवार से चल रहे प्रदर्शनों में अब तक 53 लोगों की जान जा चुकी है। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना पर अत्यधिक बल प्रयोग और गोलीबारी का आरोप लगाया है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी जमीन पर डटे हैं।
भीड़ ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि “कश्मीर में एक जान जाने पर लाखों लोग सड़कों पर उतर आते हैं” और इस हिंसा का खामियाजा पाकिस्तान को भुगतना होगा।
यह Protests पूरे कश्मीर क्षेत्र में स्वतंत्रता की चाह रखने वाले लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता दिख रहा है, जबकि पाकिस्तानी शासन के लिए यह एक बड़ा सिरदर्द बन गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अब इस बढ़ते संकट पर टिकी हैं।
