सूने घरों और झोपड़ियों पर चला बुलडोजर: पेट्रोल-डीजल की किल्लत के बीच बाड़ियों को तोड़ने में फूंका गया तेल

सूने घरों और झोपड़ियों पर चला बुलडोजर

अमरकंटक नगर परिषद की हालिया कार्रवाई को लेकर वार्ड क्रमांक 14 में लोगों के बीच नाराजगी और असंतोष का माहौल है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि बिना पूर्व सूचना के नगर परिषद की टीम जेसीबी मशीन लेकर पहुंची और कई झुग्गी-झोपड़ियों, बाड़ियों तथा सूने पड़े मकानों पर कार्रवाई शुरू कर दी। इस दौरान कथित तौर पर सात घरों और कई बाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। अचानक हुई इस कार्रवाई से क्षेत्र के लोग सहम गए और प्रभावित परिवारों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।

घर पर नहीं थे लोग, लौटे तो टूटा मिला आशियाना

स्थानीय रहवासियों का कहना है कि कार्रवाई के समय कई परिवार अपने दैनिक कामकाज और रोजगार के सिलसिले में घर से बाहर गए हुए थे। जब वे वापस लौटे तो उनके घर और बाड़ियां टूटी हुई मिलीं। लोगों का आरोप है कि उन्हें न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। प्रभावित परिवारों का कहना है कि यदि प्रशासन पहले सूचना देता तो वे आवश्यक दस्तावेज और जानकारी प्रस्तुत कर सकते थे।

गरीबों पर कार्रवाई, बड़े निर्माणों पर चुप्पी?

नगर परिषद की कार्रवाई को लेकर लोगों के बीच एक और बड़ा सवाल चर्चा में है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नगर में कई स्थानों पर बड़े और स्थायी निर्माण मौजूद हैं, लेकिन कार्रवाई मुख्य रूप से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों की झोपड़ियों, बाड़ियों और छोटे मकानों पर की जा रही है। इससे कार्रवाई की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

पेट्रोल-डीजल संकट के बीच जेसीबी पर खर्च हुआ ईंधन

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा ईंधन की खपत को लेकर हो रही है। अमरकंटक क्षेत्र में इन दिनों पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे समय में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए घंटों तक जेसीबी मशीन चलाए जाने पर लोग सवाल उठा रहे हैं।

स्थानीय कर्मचारियों के अनुसार, करीब छह घंटे तक लगातार जेसीबी संचालन में 50 से 60 लीटर तक डीजल की खपत हो सकती है। लोगों का कहना है कि जब आम नागरिक ईंधन की कमी से जूझ रहे हैं, तब बाड़ियों और छोटे निर्माणों को हटाने के लिए इतनी बड़ी मात्रा में डीजल खर्च करना भी विचारणीय विषय है।

नगर परिषद की कार्रवाई बनी बहस का मुद्दा

वार्ड-14 में हुई इस कार्रवाई के बाद नगर परिषद के फैसले और उसकी प्राथमिकताओं को लेकर बहस छिड़ गई है। प्रभावित परिवार कार्रवाई की निष्पक्ष जांच और नुकसान का आकलन करने की मांग कर रहे हैं। वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को कार्रवाई से पहले संवाद और वैधानिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था। फिलहाल यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग नगर परिषद की ओर से आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार कर रहे हैं।

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