बिना पैसे दिए सरकारी जमीन पर कब्जा? यूसुफ पठान पर हाईकोर्ट की पूछताछ- ऐसा कैसे कर सकते हैं आप?
गुजरात हाईकोर्ट ने पूर्व क्रिकेटर और टीएमसी सांसद से पूछा- बिना आवंटन और बिना भुगतान के सरकारी जमीन पर कैसे कब्जा किया? साथ ही जमीन खाली करने का अल्टीमेटम दिया
अहमदाबाद। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व सदस्य और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद यूसुफ पठान पर सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा करने को लेकर गुजरात हाईकोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने पठान से तीखा सवाल किया कि बिना किसी औपचारिक आवंटन और बिना एक पैसा दिए वह सरकारी जमीन पर कब्जा कैसे कर सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी ।
बिना आवंटन के कब्जा, कोर्ट ने उठाए सवाल
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. रे की खंडपीठ ने पठान के वकील से कहा कि यह सिर्फ एक प्रस्ताव था जिसे राज्य सरकार ने खारिज कर दिया। बस यह बताइए कि आप इस जमीन पर कब्जा कैसे कर सकते हैं? अदालत ने साफ कहा कि बिना औपचारिकता पूरी किए कोई भी सरकारी जमीन पर कब्जा नहीं कर सकता ।
अदालत ने यह भी पूछा कि क्या जमीन खाली कर दी गई है और अगर नहीं तो पठान को इसे खाली करने के लिए कितना समय चाहिए। पीठ ने चेतावनी दी कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो पठान पर जुर्माना लगाया जा सकता है और उन्हें सार्वजनिक संपत्ति के उपयोग के लिए हर्जाना भी देना पड़ सकता है ।
कोर्ट ने नगर निगम अधिकारियों से भी पूछताछ की कि कैसे उन्होंने बिना मंजूरी के इस जमीन पर घेराबंदी करने दी और मामले की जांच की चेतावनी दी ।
पूरा विवाद: 2012 से चला आ रहा मामला
यह पूरा मामला वडोदरा के टंडालजा इलाके का है, जहां पठान परिवार (यूसुफ और इरफान) अपने परिवार के साथ रहता है। 2012 में यूसुफ पठान ने अपने बंगले से सटी 978 वर्ग मीटर की इस जमीन को 99 साल के पट्टे पर लेने का प्रस्ताव रखा था। नगर निगम (VMC) ने बिना नीलामी के यह जमीन देने का प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भेजा ।
मगर 9 जून 2014 को गुजरात सरकार के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बावजूद पठान ने जमीन पर दीवार बनाकर कब्जा कर लिया और सालों तक उस पर बिना कुछ चुकाए कब्जा जमाए रखा ।
नोटिस तब आया जब बने सांसद
जून 2024 में जब यूसुफ पठान पश्चिम बंगाल के बहरामपुर से टीएमसी के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीते, तो चुनाव नतीजों के ठीक दो दिन बाद (6 जून 2024) वीएमसी ने उन्हें नोटिस जारी कर कब्जा हटाने का आदेश दिया। इसके बाद पठान ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया ।
सिंगल बेंच ने पहले ही कहा था- यूसुफ पठान अतिक्रमणकारी
इससे पहले अगस्त 2025 में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने यूसुफ पठान को अतिक्रमणकारी घोषित करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी। जस्टिस मौना भट्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पठान को इस जमीन पर कोई अधिकार नहीं है और निगम उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करे ।
सिंगल बेंच ने यह भी कहा था कि सेलिब्रिटी होने के नाते पठान समाज के रोल मॉडल हैं और उन्हें रियायत देने से समाज में गलत संदेश जाएगा। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय तक कब्जा रहने से कोई कानूनी अधिकार नहीं बन जाता ।
पठान का बचाव: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटरों के लिए थी नीति
हाईकोर्ट में पठान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शालिन मेहता ने पैरवी की। उन्होंने अक्टूबर 1999 की गुजरात सरकार की नीति का हवाला दिया, जिसके तहत अंतरराष्टीय क्रिकेटरों को कुछ शर्तों पर जमीन आवंटन का प्रावधान था। उन्होंने कहा कि वीएमसी की आम सभा ने बाजार मूल्य पर पठान को जमीन देने का प्रस्ताव पारित किया था ।
हालांकि कोर्ट ने यह कहते हुए दलील खारिज कर दी कि निगम का यह प्रस्ताव राज्य सरकार की अंतिम मंजूरी के अभाव में कभी वैध आवंटन का रूप नहीं ले पाया। कोर्ट ने साफ कहा कि बिना नीलामी के जमीन देने की निगम की कोई स्वतंत्र नीति नहीं है ।
अब क्या होगा? 15 जून को अगली सुनवाई
अब इस मामले की अगली सुनवाई 15 जून को होगी। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने यह तय होना है कि यूसुफ पठान को यह जमीन खाली करनी होगी या नहीं और क्या उन पर हर्जाना लगाया जाएगा। फिलहाल, अदालत ने साफ कर दिया है कि बिना कानूनी प्रक्रिया के सरकारी जमीन पर कब्जा करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ।
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