क्या मच्छर ही खत्म करेंगे मच्छरों को? Google की नई टेक्नोलॉजी ने चौंकाया
Google Mosquito Mission: वोल्बाचिया बैक्टीरिया से संक्रमित नर मच्छरों के जरिए डेंगू, जीका और चिकनगुनिया फैलाने वाली प्रजाति को खत्म करने की तैयारी
दुनिया एक बड़ी चुनौती से जूझ रही है, मच्छरों से फैलने वाली जानलेवा बीमारियां। अब Google की कंपनी ऐसा प्रयोग करने जा रही है जो पूरी दुनिया का भविष्य बदल सकता है। आखिर 3.2 करोड़ बांझ मच्छरों को छोड़ने के पीछे क्या है मकसद? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।
Google का अनोखा मिशन! अमेरिका में छोड़े जाएंगे 3.2 करोड़ बांझ मच्छर, डेंगू-जीका को खत्म करने की तैयारी
जहां एक तरफ दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में शॉर्ट सर्किट से लगी आग में 21 लोगों की मौत और बिहार के मुजफ्फरपुर के अस्पताल अग्निकांड में 15 लोगों की जान जाने से देश स्तब्ध है, वहीं दुनिया एक और बड़ी चुनौती से लड़ने की तैयारी कर रही है। यह चुनौती है डेंगू, जीका, चिकनगुनिया और येलो फीवर जैसी खतरनाक बीमारियों की, जो हर साल लाखों लोगों को प्रभावित करती हैं।
इसी खतरे को कम करने के लिए Google की मूल कंपनी Alphabet ने अमेरिका में एक बेहद अनोखी और हाईटेक योजना पेश की है। कंपनी ने कैलिफोर्निया और फ्लोरिडा में 3.2 करोड़ स्टेरिलाइज्ड यानी बांझ नर मच्छरों को छोड़ने की अनुमति मांगी है।
क्या है Google का ‘Debug’ प्रोजेक्ट?
यह परियोजना Google की पैरेंट कंपनी Alphabet की लाइफ साइंस यूनिट द्वारा विकसित की गई है। इसका नाम Debug Project रखा गया है। इसका मकसद एडीज एजिप्टी (Aedes Aegypti) प्रजाति के मच्छरों की आबादी को नियंत्रित करना है। यही मच्छर डेंगू, जीका वायरस, चिकनगुनिया और येलो फीवर जैसी बीमारियों को फैलाने के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं।
कैसे काम करेगी यह तकनीक?
इस परियोजना में वोल्बाचिया (Wolbachia) नामक प्राकृतिक बैक्टीरिया से संक्रमित नर मच्छरों का इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात यह है कि नर मच्छर इंसानों को नहीं काटते और बीमारियां भी नहीं फैलाते।
जब ये संक्रमित नर मच्छर मादा मच्छरों के साथ प्रजनन करेंगे, तो उनके अंडों से जीवित संतान पैदा नहीं होगी। परिणामस्वरूप धीरे-धीरे मच्छरों की संख्या में भारी गिरावट आने लगेगी।
हर साल छोड़े जाएंगे 1.6 करोड़ मच्छर
अमेरिकी पर्यावरण संरक्षण एजेंसी (EPA) के पास जमा प्रस्ताव के अनुसार कंपनी दो वर्षों तक हर साल 1.6 करोड़ मच्छर छोड़ना चाहती है। यानी कुल 3.2 करोड़ मच्छरों को खुले वातावरण में छोड़ा जाएगा।
इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक सुझाव मांगे गए हैं, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
सिंगापुर में मिल चुके हैं शानदार नतीजे
यह तकनीक कोई नई नहीं है। सिंगापुर में पहले ही इस मॉडल का सफल परीक्षण किया जा चुका है। वहां लाखों वोल्बाचिया संक्रमित नर मच्छरों को छोड़ा गया था।
सिंगापुर की नेशनल एनवायरनमेंट एजेंसी के मुताबिक प्रभावित क्षेत्रों में एडीज एजिप्टी मच्छरों की संख्या 80 से 90 प्रतिशत तक घट गई थी। इतना ही नहीं, छह से बारह महीनों के भीतर डेंगू के मामलों में 70 प्रतिशत से ज्यादा की कमी दर्ज की गई।

क्यों जरूरी पड़ रही है नई तकनीक?
विशेषज्ञों का मानना है कि पारंपरिक कीटनाशक अब पहले जितने प्रभावी नहीं रहे हैं। लगातार इस्तेमाल से मच्छरों में प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो रही है और पर्यावरण पर भी इसका असर पड़ रहा है।
ऐसे में AI, डेटा एनालिटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी की मदद से तैयार किया गया यह मॉडल अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प माना जा रहा है।
क्या दुनिया बदल सकता है यह प्रयोग?
Debug परियोजना के प्रमुख लिनस अप्सन का कहना है कि सिंगापुर में मिली सफलता ने इस तकनीक पर भरोसा बढ़ाया है। यदि EPA इस योजना को मंजूरी देता है, तो यह दुनिया के सबसे बड़े तकनीक-आधारित मच्छर नियंत्रण अभियानों में से एक बन जाएगा।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रयोग सफल रहा तो आने वाले वर्षों में डेंगू और जीका जैसी बीमारियों पर वैश्विक स्तर पर बड़ी रोक लगाई जा सकती है।
