666 बोरी धान बीज जब्त! गरियाबंद में कृषि विभाग की बड़ी रेड, 3 दुकानें सील

किसानों की मेहनत लूटने वाले बेईमान व्यापारियों पर सख्त एक्शन, लेकिन सिस्टम की खामियां क्यों नहीं खत्म हो रही?

 

गरियाबंद : छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में कृषि विभाग ने अवैध बीज भंडारण और कालाबाजारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए देवभोग और मैनपुर विकासखंड के चार बीज विक्रय केंद्रों पर छापा मारा। 666 बोरी धान बीज जब्त कर तीन दुकानों को सील कर दिया गया। यह कार्रवाई उप संचालक कृषि चंदन रॉय, सहायक संचालक कृषि और बीज निरीक्षक अनिल कुमार कौशिक की टीम ने की।

 

मेसर्स विकास ट्रेडर्स (सिनापाली) में अघोषित परिसर में बीज भंडारण, बिना स्रोत प्रमाण पत्र के विक्रय, दस्तावेज न रखना और मासिक रिपोर्ट न भेजना पाया गया। मेसर्स शारदा बीज उत्पाद (सिनापाली), मेसर्स लच्छु धान बीज एवं मक्का भंडार (ढोर्रा) तथा मेसर्स मिश्रा ट्रेडर्स (धनौरा) पर मूल्य सूची न लगाने, बिना लाइसेंस विक्रय और बीज अधिनियम के उल्लंघन के आरोप लगे। विभाग ने इन दुकानों पर 10 दिनों का विक्रय प्रतिबंध लगा दिया।

 

 किसानों की जेब काटने वाला सिस्टम

यह घटना अकेली नहीं है। छत्तीसगढ़ में खाद-बीज की कालाबाजारी एक पुरानी बीमारी बन चुकी है। गरियाबंद में ही हाल ही में फिंगेश्वर और छुरा क्षेत्र में 603 बोरी खाद जब्त की गई। किसान खरीफ सीजन से पहले खाद न मिलने पर सहकारी समितियों को घेर रहे हैं, प्रदर्शन कर रहे हैं।

 

राज्य स्तर पर स्थिति और गंभीर है। राजनांदगांव में 2300 बोरी खाद जब्त, बलरामपुर में 1150 बोरी अवैध यूरिया, जांजगीर-चांपा में 2638 बोरी जब्ती ये आंकड़े दिखाते हैं कि माफिया सक्रिय है। कोंडागांव जैसे जिलों में हजारों बोरी यूरिया गायब होने के मामले सामने आए। राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ खाद कालाबाजारी के मामलों में पांचवें स्थान पर है, जो बेहद शर्मनाक है।

 

आलोचना का मुद्दा: विभाग समय-समय पर छापेमारी कर रहा है, लेकिन समस्या जड़ से क्यों नहीं हल हो रही?

सहकारी समितियों में सांठ-गांठ: कई जगहों पर सरकारी योजनाओं की खाद-बीज सीधे बाजार में पहुंच जाती है।

निगरानी की कमी: ग्रामीण क्षेत्रों में निरीक्षण औपचारिकता बनकर रह गया है।

बिना बिल विक्रय: किसान बिना बिल खरीदते हैं, बाद में शिकायत करने पर सबूत नहीं मिलता।

राजनीतिक संरक्षण? बार-बार ऐसे मामले उजागर होते हैं, लेकिन बड़े माफिया पर सख्त एक्शन कम दिखता है।

 

किसान जो खेत में पसीना बहाता है, उसे बीज और खाद निर्धारित दर से दोगुनी कीमत पर खरीदना पड़ता है। यह न सिर्फ उनकी आय घटाता है बल्कि उत्पादन भी प्रभावित करता है।

 

विभाग की अपील

उप संचालक कृषि चंदन रॉय ने किसानों से अपील की है कि केवल अधिकृत विक्रेताओं से खरीदें, पक्का बिल लें और अनियमितता पर इन नंबरों पर शिकायत करें:

9977106777, 7987538588, 9131198044

 

विभाग दावा करता है कि खाद-बीज वितरण की निगरानी सतत हो रही है और उच्च गुणवत्ता वाले इनपुट उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। कई जिलों में किसान अभी भी कमी की शिकायत कर रहे हैं।

 

 छत्तीसगढ़ में कृषि संकट

छत्तीसगढ़ धान का कटोरा है, लेकिन किसान बार-बार इनपुट की किल्लत और महंगाई से जूझ रहे हैं। 2025-26 में राष्ट्रीय स्तर पर लाखों छापेमारियां हुईं, जिसमें छत्तीसगढ़ भी शामिल रहा। फिर भी समस्या बनी हुई है।

 

क्यों बढ़ रही है कालाबाजारी?

1. मुनाफाखोरी: सब्सिडी वाली खाद बाजार में ऊंचे दाम पर बिकती है।

2. अवैध भंडारण: गोदामों और अघोषित जगहों पर स्टॉक छिपाया जाता है।

3. कमजोर लॉजिस्टिक्स: सहकारी समितियों तक पहुंचने में देरी।

4. जागरूकता की कमी: कई किसान अभी भी बिना बिल और अधिक मूल्य पर खरीद लेते हैं।

 

किसानों से अपील

हमेशा अधिकृत केंद्र से खरीदें, बिल रखें और शिकायत करें। आपकी चुप्पी माफिया को मजबूत करती है।

कृषि विभाग की यह मुहिम सराहनीय है, लेकिन बिना सिस्टम सुधार के यह सिर्फ फुटपाथ की सफाई जैसी साबित होगी।

 

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