27 मई 1964: जब भारत ने खो दिया अपना पहला प्रधानमंत्री, जवाहरलाल नेहरू के अंतिम दिन की कहानी

जवाहरलाल नेहरू

भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का अंतिम समय 26 और 27 मई 1964 के बीच बेहद नाजुक परिस्थितियों में बीता। खराब स्वास्थ्य के बावजूद वह 26 मई की शाम देहरादून से हेलिकॉप्टर के जरिए दिल्ली लौटे थे। बताया जाता है कि यात्रा के दौरान और उसके बाद उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती रही, और वह थके हुए तथा अस्वस्थ अवस्था में अपने आधिकारिक आवास तीन मूर्ति भवन पहुंचे।

देहरादून से दिल्ली तक की आखिरी यात्रा

रिपोर्ट्स के अनुसार, Jawaharlal Nehru कुछ दिनों के स्वास्थ्य अवकाश पर देहरादून गए थे, लेकिन उनकी सेहत में कोई खास सुधार नहीं हुआ। 26 मई की शाम वह हेलिकॉप्टर से दिल्ली के लिए रवाना हुए और लगभग 8 बजे प्रधानमंत्री आवास पहुंचे। बताया जाता है कि उस समय वह काफी थके हुए थे और चलने-फिरने में भी उन्हें कठिनाई हो रही थी।

रातभर बिगड़ती तबीयत और दर्द की शिकायत

दिल्ली लौटने के बाद उनकी स्थिति और कमजोर होती चली गई। रात के दौरान वे कई बार नींद से जागते रहे और शरीर में दर्द की शिकायत करते रहे। उनके साथ मौजूद सहयोगी उन्हें दवाएं देकर आराम देने की कोशिश करते रहे, लेकिन उनकी हालत में खास सुधार नहीं हुआ।

27 मई की सुबह और अंतिम क्षण

कई ऐतिहासिक रिपोर्ट्स के अनुसार, 27 मई 1964 की सुबह उनकी तबीयत अचानक और बिगड़ गई। कुछ रिपोर्ट्स में हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी स्थितियों का उल्लेख मिलता है, जिसके बाद वह बेहोशी की अवस्था में चले गए। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि वे लंबे समय तक कोमा जैसी स्थिति में रहे। सुबह की इस गंभीर स्थिति के बाद डॉक्टरों की टीम लगातार प्रयास करती रही, लेकिन उनकी हालत में सुधार नहीं हो सका।

संसद में गूंजा शोक संदेश

27 मई की दोपहर संसद में उनके निधन की आधिकारिक सूचना दी गई। जैसे ही यह खबर सामने आई, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। कुछ ही समय बाद Gulzarilal Nanda को देश का कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया।

देशभर में शोक और ऐतिहासिक क्षण

उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। दिग्गज नेताओं, आम जनता और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने इस घटना को ऐतिहासिक क्षति बताया। कुछ रिपोर्टों में यह भी उल्लेख मिलता है कि उस दिन देश में कई निजी आयोजन, जैसे विवाह समारोह, गमगीन माहौल में बदल गए। 29 मई 1964 को उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया, जिससे भारत ने अपने पहले प्रधानमंत्री को अंतिम विदाई दी।

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