गिनती के रोजगार… करोड़ों बेरोजगार! जुमलों के भरोसे चल रहा भारत, युवाओं का भविष्य कितना सुरक्षित?
आज रोजगार मेले में 51 हजार से ज्यादा नियुक्ति पत्र बांट चुकी है। सरकार का दावा है कि अब तक करीब 12 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र दिए जा चुके हैं
नरेंद्र मोदी की सरकार 12 साल से देश चला रही है। हर भाषण में विकसित भारत, युवाओं का भविष्य और 2 करोड़ नौकरियां हर साल जैसे बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन हकीकत में करोड़ों युवा बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं। रोजगार मेलों में कुछ हजार नियुक्ति पत्र बांटकर सरकार जश्न मनाती है, जबकि देश की बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। यह लेख मोदी सरकार की नाकामियों पर सीधा हमला है।
युवा बेरोजगारी का भयानक चेहरा
2026 में भारत की कुल बेरोजगारी दर अप्रैल में 5.2 प्रतिशत पहुंच गई, जो छह महीने का उच्चतम स्तर है। युवाओं (15-29 साल) में यह दर 15.2 प्रतिशत तक है। युवा महिलाओं में तो 17.7 प्रतिशत! Azim Premji University की रिपोर्ट्स और PLFS डेटा साफ बताते हैं कि ग्रेजुएट युवाओं में 40 प्रतिशत तक बेरोजगारी है।
हर साल 1 करोड़ से ज्यादा युवा नौकरी बाजार में आते हैं, लेकिन अच्छी नौकरियां कहां हैं? IT सेक्टर में छंटनी हो रही है, AI पुरानी जॉब्स छीन रहा है। मोदी सरकार 19वें रोजगार मेले में 51 हजार युवाओं को लेटर बांट रही है और दावा कर रही है कि अब तक 12 लाख दिए जा चुके हैं। लेकिन यह आंकड़ा करोड़ों बेरोजगार युवाओं के सामने मजाक है!
शिक्षित युवा अब डिलीवरी बॉय, दुकानदार या सफाई कर्मचारी बनने को मजबूर हैं। NEET युवाओं की संख्या 25 प्रतिशत के करीब है। मोदी जी, यह आपका “डेमोग्राफिक डिविडेंड” है या अभिशाप? 2014 में आपने युवाओं से वादा किया था, लेकिन 12 साल बाद स्थिति बद से बदतर है।
जॉबलेस ग्रोथ… विकास का ढोंग
अर्थव्यवस्था 7 प्रतिशत बढ़ रही है, इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, लेकिन नौकरियां नहीं। यह “जॉबलेस ग्रोथ” है अमीरों और बड़े कारोबारियों का विकास, गरीबों का शोषण। कृषि में 40-45 प्रतिशत लोग फंसे हैं, जहां छुपी बेरोजगारी बहुत ज्यादा है। गिग वर्कर्स (Swiggy, Uber) दिन-रात मेहनत करते हैं, लेकिन कोई सुरक्षा, पेंशन या स्थिर आय नहीं।
मोदी सरकार ‘मेक इन इंडिया’, PLI स्कीम की डींग हांकती है, लेकिन असंगठित क्षेत्र में 70-75 प्रतिशत लोग 15 हजार रुपये महीना से कम कमाते हैं। विदेश यात्राओं में निवेश की बात करते हैं, लेकिन घरेलू युवा बेरोजगार सड़कों पर हैं। बड़े वादे (2 करोड़ जॉब्स सालाना) झूठ साबित हुए। आलोचक सही कहते हैं नीतियां कॉर्पोरेट फ्रेंडली हैं, आम युवा और छोटे उद्योग उपेक्षित।
किसानों की अनदेखी
किसान मोदी सरकार की नीतियों से त्रस्त हैं। MSP की गारंटी, कर्ज माफी और आय सुरक्षा की मांग पर लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। 2026 में US-India ट्रेड डील के खिलाफ किसान सड़कों पर उतरे, क्योंकि सस्ते आयात उनकी फसलों को बर्बाद कर देंगे।
मनरेगा में काम के दिन कम, मजदूरी देरी से मिलती है। जलवायु परिवर्तन, महंगाई और बढ़ती लागत छोटे किसानों को कर्ज के जाल में फंसा रही है। कई किसान आत्महत्या को मजबूर हो रहे हैं। मोदी सरकार किसानों को “अन्नदाता” कहती है, लेकिन नीतियां उन्हें कॉर्पोरेटों के हाथ बेचने वाली हैं। तीन कृषि कानूनों के समय का विरोध आज भी याद है, सरकार ने दमन किया, लेकिन समस्या जस की तस।
महंगाई, असमानता और महिलाओं की दुर्दशा
खाद्य महंगाई गरीबों का जीना मुहाल कर रही है। अमीर-गरीब की खाई बढ़ती जा रही है ऊपरी 1 प्रतिशत के पास देश की ज्यादातर संपत्ति। Oxfam जैसी रिपोर्ट्स मोदी काल में बढ़ती असमानता को उजागर करती हैं।
महिलाओं की श्रम भागीदारी बहुत कम है। सुरक्षा की कमी, सामाजिक बंधन और स्किल मिसमैच उन्हें घर तक सीमित रखते हैं। शहरों की ओर पलायन बढ़ा है, लेकिन वहां सस्ता आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य नहीं। COVID काल में माइग्रेंट वर्कर्स की दुर्दशा मोदी सरकार की नाकामी का सबूत थी लाखों बिना सहारे लौटे।
मोदी सरकार का प्रचार तंत्र और सच्चाई से भागना
रोजगार मेला, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और भाषण सब प्रचार का हिस्सा। पीएम मोदी कहते हैं कि दुनिया भारत के युवाओं को देख रही है, लेकिन घर में युवा निराश हैं। विदेश में सेमीकंडक्टर, AI, ग्रीन टेक्नोलॉजी की बातें, लेकिन घरेलू स्तर पर स्किल डेवलपमेंट फेल।
विपक्ष और विशेषज्ञ आरोप लगाते हैं कि सरकार असली मुद्दों बेरोजगारी, महंगाई, किसान संकट पर जवाब नहीं देती, सिर्फ “अपना कह जाती है”। चुनावी मौकों पर रोजगार मेले बढ़ जाते हैं। 30 लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं, फिर भी भर्तियां धीमी।
AI और टेक्नोलॉजी की वजह से और छंटनी हो रही है, लेकिन सरकार के पास ठोस योजना नहीं। युवा कांग्रेस जैसे संगठन विरोध कर रहे हैं, लेकिन सरकार दमन और प्रचार पर अड़ी है।
मोदी की नाकामी क्यों?
वादों का झूठ: 2014 का “अच्छे दिन” आज भी सपना है।
कॉर्पोरेट पक्षपात: नीतियां अमीरों के लिए, आम आदमी उपेक्षित।
डेटा छुपाना और प्रचार: असली आंकड़ों को नजरअंदाज कर “सफलता” बताना।
विभाजन की राजनीति: बेरोजगारी पर ध्यान कम, धार्मिक मुद्दों पर ज्यादा।
विफल सुधार: शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि में कोई क्रांतिकारी बदलाव नहीं।
भारत के पास दुनिया का सबसे बड़ा युवा वर्ग है, लेकिन मोदी सरकार इसे बोझ बना रही है।
मोदी सरकार बदलाव लाए या सत्ता छोड़ दे
2026 में मोदी सरकार की कहानी दोहरी है प्रचार की चमक, हकीकत की पीड़ा। बेरोजगारी, किसान संकट, महंगाई और असमानता ने युवा भारत को तोड़ दिया है। रोजगार मेला अच्छा है, लेकिन लाखों की जरूरत में हजारों बांटना मजाक है।
मोदी जी, देश की पड़ी है या नहीं? जवाब दो! युवा सिर्फ नौकरी नहीं, सम्मानजनक जीवन चाहते हैं। अगर सरकार प्रचार छोड़कर असली काम नहीं करेगी, तो सामाजिक अस्थिरता बढ़ेगी।
सरकार को अब प्रचार बंद करके काम दिखाना होगा वरना इतिहास आपको नाकाम साबित करेगा।
