18 सूत्रीय मांगों को लेकर सफाई कर्मचारियों हड़ताल जारी: शहर में सफाई व्यवस्था चरमराई, 6वें दिन भी नहीं उठा कचरा
रायपुर: वेतन वृद्धि, पीएफ और ड्यूटी समय में बदलाव समेत 18 सूत्रीय मांगों को लेकर रामकी कंपनी के सफाई कर्मचारियों की हड़ताल लगातार जारी है। हड़ताल के कारण शहर में डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन लगातार छठे दिन भी पूरी तरह प्रभावित रहा, जिससे आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
70% वाहन डिपो में खड़े रहे
गोकुलनगर और दलदल सिवनी सेंटर में सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित दिखी। सोमवार को लगभग 70 फीसदी सफाई वाहन डिपो में ही खड़े रहे, जबकि केवल 30 फीसदी वाहनों को ही वैकल्पिक व्यवस्था के तहत कुछ इलाकों में कचरा उठाने के लिए भेजा गया। लगातार कई दिनों से कचरा नहीं उठने से शहर के कई हिस्सों में गंदगी फैल गई है।
शहर में जगह-जगह कचरे के ढेर
हड़ताल का असर शहर के प्रमुख बाजारों और रिहायशी इलाकों में साफ दिखाई दिया। शास्त्री बाजार, गोलबाजार, एवरग्रीन चौक, मटन मार्केट, गणेशराम नगर और बाम्बे मार्केट जैसे क्षेत्रों में जगह-जगह कूड़े के ढेर जमा हो गए हैं। नगर निगम के 70 वार्डों में सफाई व्यवस्था लगभग ठप जैसी स्थिति में पहुंच गई है।
कंपनी ने नई भर्ती का ऐलान किया
इधर, सफाई कर्मचारियों की मांगों पर अड़े रहने के बीच रामकी कंपनी ने नई भर्ती की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी की ओर से ड्राइवर और हेल्पर पदों के लिए भर्ती के पोस्टर जारी किए गए हैं। सिटी हेड ने साफ कहा है कि काम पर नहीं लौटने वाले कर्मचारियों की जगह नए कर्मचारियों से व्यवस्था संभाली जाएगी। इस संबंध में पार्षदों से भी सहयोग मांगा गया है।
प्रशासन और कर्मचारियों के बीच बैठक आज
स्थिति को संभालने के लिए श्रम विभाग, नगर निगम और रामकी कंपनी के प्रतिनिधियों की बैठक मंगलवार को प्रस्तावित है। बैठक में कर्मचारियों की मांगों और हड़ताल से उत्पन्न हालात पर चर्चा की जाएगी, ताकि समाधान निकाला जा सके।
महापौर की सख्त चेतावनी
महापौर मीनल चौबे ने रामकी कंपनी प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि पुरानी कार्यबल काम पर वापस नहीं आती है, तो तत्काल नए कर्मचारियों की नियुक्ति कर सफाई व्यवस्था बहाल की जाए। उन्होंने कहा कि जनता को हो रही परेशानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल
लगातार छह दिनों से कचरा संग्रहण ठप रहने से शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान उत्पन्न इस स्थिति ने नगर निगम और प्रबंधन दोनों के लिए चुनौती खड़ी कर दी है।
