Bhojshala में गूंजे पूजा-पाठ के स्वर: हाईकोर्ट के फैसले के बाद श्रद्धालुओं ने किए दर्शन, मुस्लिम पक्ष SC जाने की तैयारी में

Bhojshala

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद धार की Bhojshala में बदला माहौल, हिंदू पक्ष ने किया स्वागत

सालों पुराने विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद पहली बार Bhojshala में खुले तौर पर पूजा-अर्चना हुई… श्रद्धालुओं ने कहा “अब बिना रोक-टोक दर्शन हो रहे हैं”, वहीं मुस्लिम पक्ष सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है। आखिर फैसले में ऐसा क्या कहा गया जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में हुई पूजा-अर्चना, श्रद्धालुओं में उत्साह

Bhojshala को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद शनिवार को परिसर में अलग ही माहौल देखने को मिला। वर्षों से विवादों में रहे इस स्थल पर हिंदू श्रद्धालुओं ने पहुंचकर पूजा-अर्चना की और फैसले का स्वागत किया।

धार जिले में स्थित भोजशाला-कमाल मौला परिसर को लेकर लंबे समय से हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद चल रहा था। लेकिन 15 मई को Madhya Pradesh High Court की इंदौर खंडपीठ ने बड़ा फैसला सुनाते हुए पूरे परिसर को मंदिर घोषित कर दिया और हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दे दिया।

फैसले के अगले ही दिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में परिसर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा की। कई लोगों ने इसे ऐतिहासिक दिन बताया।

“अब बिना रोक-टोक दर्शन हो रहे हैं”

Bhojshala पहुंचे श्रद्धालुओं में फैसले को लेकर काफी उत्साह नजर आया। एक श्रद्धालु ने कहा कि कई वर्षों बाद उन्हें बिना किसी रोक-टोक के दर्शन करने का मौका मिला है।

उन्होंने कहा, “अदालत ने बहुत अच्छा फैसला दिया है। अब यहां किसी तरह की बाधा नहीं है। मैं अब रोज यहां पूजा करने आऊंगा।”

फैसले के बाद परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई थी, लेकिन माहौल पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा।

क्या कहा हाईकोर्ट ने?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में माना कि विवादित स्थल मूल रूप से देवी वाग्देवी यानी माता सरस्वती को समर्पित मंदिर था, जिसका संबंध भोज-परमार वंश से है।

अदालत ने यह भी कहा कि यह स्थल एक संरक्षित स्मारक है और इसका प्रशासनिक नियंत्रण पूरी तरह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण यानी Archaeological Survey of India (ASI) के पास रहेगा।

ASI की ओर से पैरवी कर रहे वकील अविरल विकास खरे ने बताया कि भोजशाला को वर्ष 1904 से संरक्षित स्मारक का दर्जा प्राप्त है। इसका मतलब यह है कि परिसर का पूरा नियंत्रण ASI के अधीन रहेगा और वही इसके संरक्षण और प्रशासन का कार्य करेगा।

मुस्लिम पक्ष की नमाज पर रोक

फैसले में अदालत ने ASI के पुराने आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसके तहत मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार के दिन एक निश्चित समय तक नमाज पढ़ने की अनुमति दी जाती थी।

अब अदालत के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष को परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं रहेगी। इसी वजह से यह फैसला काफी चर्चा में है और दोनों पक्षों के बीच नई कानूनी लड़ाई की संभावना भी बढ़ गई है।

सुप्रीम कोर्ट जा सकता है मुस्लिम पक्ष

हाईकोर्ट का फैसला आने के कुछ ही घंटों बाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में दो कैविएट याचिकाएं दाखिल की गईं। माना जा रहा है कि मुस्लिम पक्ष जल्द ही फैसले को चुनौती देने के लिए Supreme Court of India का रुख कर सकता है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा चर्चा का विषय बन सकता है।

वर्षों पुराना है Bhojshala विवाद

धार स्थित Bhojshala परिसर लंबे समय से विवादों में रहा है। हिंदू पक्ष इसे माता वाग्देवी का मंदिर मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता आया है।

अब हाईकोर्ट के फैसले ने इस विवाद को नई दिशा दे दी है। अदालत ने ऐतिहासिक और पुरातात्विक तथ्यों के आधार पर स्थल को मंदिर माना है।

Bhojshala

ASI की भूमिका अहम

फैसले के बाद अब ASI की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। परिसर की सुरक्षा, रखरखाव और धार्मिक गतिविधियों के प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी उसी के पास रहेगी।

प्रशासन भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी तरह का तनाव न पैदा हो।

भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट का फैसला मध्य प्रदेश ही नहीं, पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। फैसले के बाद पहली बार खुले तौर पर पूजा-अर्चना होने से हिंदू पक्ष में खुशी का माहौल है, वहीं मुस्लिम पक्ष कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा और आगे इस विवाद में क्या नया मोड़ आता है।

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