Mohla Village River Erosion: सड़क बचाने खुद उतरे ग्रामीण, श्रमदान से बना रहे सीमेंट दीवार
Mohla Village River Erosion के बीच बरारमुंडी गांव के ग्रामीण शिवनाथ नदी कटाव रोकने खुद श्रमदान कर सीमेंट दीवार बना रहे हैं। प्रशासन पर अनदेखी के आरोप।
Mohla Village River Erosion को लेकर छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले से एक अनोखी लेकिन चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से लगातार गुहार लगाने के बावजूद मदद नहीं मिलने पर अब ग्रामीण खुद अपने गांव और सड़क को बचाने मैदान में उतर गए हैं। शिवनाथ नदी के किनारे बसे बरारमुंडी गांव के लोग श्रमदान कर सीमेंट की दीवार और पचरी का निर्माण कर रहे हैं, ताकि नदी कटाव को रोका जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा कार्य नहीं किया गया, तो आने वाले बारिश के मौसम में गांव का संपर्क पूरी तरह टूट सकता है। यही वजह है कि अब गांव के महिला, पुरुष, बुजुर्ग और युवा मिलकर खुद निर्माण कार्य कर रहे हैं।
शिवनाथ नदी का कटाव बना बड़ी समस्या
Mohla Village River Erosion का मुख्य कारण शिवनाथ नदी का लगातार बढ़ता कटाव बताया जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के दौरान नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है, जिससे सड़क किनारे की जमीन लगातार नदी में समाती जा रही है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि गांव को राजनांदगांव और आसपास के क्षेत्रों से जोड़ने वाली मुख्य सड़क का हिस्सा भी नदी में बह चुका है। सड़क के किनारे गहरी दरारें पड़ गई हैं और लोगों को जोखिम उठाकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
ग्रामीणों को डर है कि यदि जल्द स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो आने वाले मानसून में हालात और खराब हो सकते हैं।
ग्रामीणों ने खुद शुरू किया निर्माण कार्य
Mohla Village River Erosion से परेशान ग्रामीणों ने आखिरकार खुद ही समाधान निकालने का फैसला लिया। गांव में बैठक कर तय किया गया कि हर घर से लोग श्रमदान करेंगे और चंदा इकट्ठा कर नदी किनारे सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी।
इसके बाद ग्रामीणों ने अपने पैसे से सीमेंट, गिट्टी, सरिया और अन्य निर्माण सामग्री खरीदना शुरू किया। बीते दो महीनों से लगातार गांव के लोग मिलकर पचरी और सीमेंट दीवार का निर्माण कर रहे हैं।
सबसे खास बात यह है कि इस काम में गांव की महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।
महिला, बुजुर्ग और युवा सभी जुटे
Mohla Village River Erosion के खिलाफ चल रहे इस सामूहिक अभियान में हर वर्ग के लोग शामिल हैं। सुबह और शाम दो पालियों में ग्रामीण निर्माण कार्य में जुटते हैं।
गांव के बुजुर्ग लोगों का कहना है कि यह सड़क सिर्फ रास्ता नहीं, बल्कि गांव की जीवनरेखा है। इसी मार्ग से बच्चों की पढ़ाई, किसानों की फसल और मरीजों का आवागमन होता है।
महिलाओं ने भी कहा कि यदि सड़क कट गई, तो गांव का संपर्क टूट जाएगा और रोजमर्रा की जिंदगी पर बड़ा असर पड़ेगा।
खेतों तक पहुंच गया नदी का कटाव
Mohla Village River Erosion अब सिर्फ सड़क तक सीमित नहीं रहा। ग्रामीणों के मुताबिक नदी का कटाव खेतों तक पहुंच चुका है। कई किसानों की जमीन धीरे-धीरे नदी में समा रही है।
गांव वालों का कहना है कि यदि इसी तरह कटाव जारी रहा, तो खेती पर भी गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। इससे ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होगी।
इसी डर के कारण ग्रामीण बिना सरकारी मदद का इंतजार किए खुद मैदान में उतर गए हैं।
प्रशासन पर लगाए अनदेखी के आरोप
Mohla Village River Erosion को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर अनदेखी के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार विधायक, सांसद और अधिकारियों से नदी कटाव रोकने की मांग की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद मौके का निरीक्षण तक नहीं किया गया। यही कारण है कि लोगों का भरोसा अब सरकारी तंत्र से उठता जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर प्रशासन ध्यान देता, तो उन्हें खुद लाखों रुपये खर्च कर निर्माण कार्य शुरू नहीं करना पड़ता।

कलेक्टर से नहीं हो सकी मुलाकात
Mohla Village River Erosion मामले में स्थानीय पत्रकारों ने प्रशासन का पक्ष जानने की कोशिश भी की। जानकारी के मुताबिक संवाददाता ने कलेक्टर से मुलाकात कर इस गंभीर समस्या पर बात करने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें समय नहीं मिल सका।
इस वजह से ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होगा, तब तक शायद प्रशासन ध्यान नहीं देगा।
बारिश से पहले बढ़ी चिंता
Mohla Village River Erosion को लेकर ग्रामीणों की चिंता अब और बढ़ गई है, क्योंकि मानसून करीब है। गांव वालों का कहना है कि अगर तेज बारिश हुई, तो नदी का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है और सड़क पूरी तरह बह सकती है।
ग्रामीणों को डर है कि ऐसी स्थिति में गांव का संपर्क टूट जाएगा और आपातकालीन सेवाओं तक पहुंच मुश्किल हो जाएगी।
इसी वजह से लोग तेजी से निर्माण कार्य पूरा करने में जुटे हैं।
ग्रामीणों की एकजुटता बनी मिसाल
Mohla Village River Erosion के बीच बरारमुंडी गांव के लोगों की एकजुटता अब चर्चा का विषय बन गई है। बिना सरकारी सहायता के ग्रामीणों द्वारा सामूहिक श्रमदान कर सुरक्षा दीवार बनाना सामाजिक सहयोग की मिसाल माना जा रहा है।
हालांकि लोग यह भी कह रहे हैं कि मूल जिम्मेदारी प्रशासन की होती है और ऐसे कामों के लिए ग्रामीणों को मजबूर नहीं होना चाहिए।
प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार नदी कटाव से परेशान बरारमुंडी गांव के लोगों ने आखिरकार खुद अपने गांव और सड़क को बचाने की जिम्मेदारी उठा ली है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है और ग्रामीणों को स्थायी समाधान मिल पाता है या नहीं।
Read more-
