छत्तीसगढ़ में रईसों का ‘हाईटेक नशा’; भिलाई में बिना मिट्टी उगने वाला हाइड्रोपोनिक गांजा पकड़ाया
छत्तीसगढ़ अब सिर्फ पारंपरिक गांजा तस्करी का ट्रांजिट रूट नहीं रह गया है, बल्कि यहां हाईटेक और महंगे नशे की एंट्री भी तेजी से बढ़ रही है। दुर्ग जिले के भिलाई शहर में पुलिस ने पहली बार हाइड्रोपोनिक गांजा जब्त कर एक बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं। यह वही प्रीमियम ड्रग है, जो आमतौर पर मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों की रेव पार्टियों में इस्तेमाल होता है।
1 ग्राम की कीमत सुनकर चौंक जाएंगे
पुलिस ने तालपुरी और हुडको इलाके से जिस हाइड्रोपोनिक गांजे को बरामद किया है, उसकी कीमत बेहद ज्यादा है। जहां सामान्य गांजा कुछ हजार रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिलता है, वहीं इस हाईटेक गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 2,000 से 4,000 रुपये प्रति ग्राम तक बताई जा रही है।
दो आरोपी गिरफ्तार, महंगी स्मोकिंग किट भी मिली
इस मामले में पुलिस ने विक्रम साहू और यश विश्वकर्मा को गिरफ्तार किया है। उनके पास से 2.3 ग्राम हाइड्रोपोनिक गांजा बरामद हुआ। हालांकि मात्रा कम है, लेकिन इसकी कीमत और आरोपियों के पास मिली महंगी स्मोकिंग किट इस बात की ओर इशारा करती है कि भिलाई में इस नशे का एक हाई-प्रोफाइल ग्राहक वर्ग तैयार हो रहा है।
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डेटा बता रहा है—नशे का ट्रेंड बदल रहा है
पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो छत्तीसगढ़ में नशे का कारोबार अब तेजी से हाईटेक होता जा रहा है।
साल 2024-25 में प्रदेश में 1500 किलो से अधिक गांजा जब्त किया गया, लेकिन हाइड्रोपोनिक गांजे का यह पहला मामला सामने आया है।
वहीं, महासमुंद जिले में पुलिस ने NH-53 पर कार्रवाई करते हुए फॉर्च्यूनर और स्कॉर्पियो जैसी लग्जरी गाड़ियों को रोका, जिनसे 281 किलो गांजा बरामद हुआ। इसकी कीमत करीब 1.40 करोड़ रुपये आंकी गई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि तस्कर अब ओडिशा से छत्तीसगढ़ के रास्ते पुणे और मुंबई जैसे बड़े शहरों तक सप्लाई नेटवर्क फैला रहे हैं।
क्या है हाइड्रोपोनिक गांजा?
हाइड्रोपोनिक तकनीक में गांजे की खेती बिना मिट्टी के की जाती है। इसे बंद कमरों में LED लाइट और पोषक तत्वों से भरपूर पानी की मदद से उगाया जाता है।
इस प्रक्रिया में तैयार गांजे में THC (नशीला तत्व) की मात्रा सामान्य गांजे की तुलना में 5 से 10 गुना ज्यादा होती है। यही कारण है कि यह ज्यादा असरदार, महंगा और खतरनाक माना जाता है।
