सहकारिता विभाग पर कांग्रेस का हमला, 850 कर्मचारियों के वेतन पर उठे सवाल

छत्तीसगढ़ में सहकारिता विभाग को लेकर सियासत तेज हो गई है। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ प्रवक्ता घनश्याम राजू तिवारी ने भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और मनमानी के गंभीर आरोप लगाए हैं।

850 कर्मचारियों की वेतन वृद्धि पर रोक

तिवारी ने कहा कि जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के करीब 850 कर्मचारियों की वैध वार्षिक वेतन वृद्धि को रोका जाना भ्रष्टाचार का स्पष्ट उदाहरण है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग के मंत्री, सचिव और पंजीयक की तिकड़ी सहकारिता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रही है।

 

“नियम सिर्फ कुछ लोगों के लिए?”

तिवारी ने सहकारिता मंत्री केदार कश्यप पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मंत्री के भाई दिनेश कश्यप, जो जगदलपुर जिला सहकारी बैंक के प्राधिकृत अध्यक्ष हैं, उनके क्षेत्र में कर्मचारियों के 6 साल से रुके वेतन को जल्द बहाल कर दिया गया, जबकि रायपुर के कर्मचारियों के मामले में जानबूझकर देरी की जा रही है।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नियम केवल “चंदा देने वालों” के लिए ही बदले जाते हैं?

कोर्ट केस को बताया सरकारी संसाधनों की बर्बादी

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि रायपुर के कर्मचारियों ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर से अपना हक जीत लिया था, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी।

तिवारी के मुताबिक, यह कर्मचारियों के खिलाफ व्यक्तिगत लड़ाई है, जिसे जनता के पैसे से लड़ा जा रहा है।

अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल

तिवारी ने रायपुर सीईओ अपेक्षा व्यास और तत्कालीन संयुक्त पंजीयक टावरी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि अधिकारी मनमाने तरीके से फाइलें तैयार करवा रहे हैं और दलालों के जरिए हस्ताक्षर करवा रहे हैं।

केंद्र से हस्तक्षेप की मांग

कांग्रेस ने अमित शाह से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। तिवारी ने कहा कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस लेकर 850 कर्मचारियों का 6 साल का बकाया वेतन तुरंत जारी किया जाए।

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