छत्तीसगढ़ विधानसभा में उद्योगों के अपशिष्ट, छातिम वृक्ष, NPS-OPS और कर्मा एथेनिक रिसोर्ट पर सदन में हुई अहम चर्चा

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के 15वें दिन सदन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रश्नकाल के दौरान अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योगों, छातिम और सप्तपर्णी वृक्षों के रोपण, कर्मचारियों के NPS से OPS चयन तथा मैनपाट स्थित कर्मा एथेनिक रिसोर्ट जैसे विषयों ने सदन में खासा जोर पकड़ा। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, विधायक सुनील सोनी, पुन्नूलाल मोहले और रामकुमार टोप्पो ने अलग-अलग मुद्दों पर सरकार से जानकारी मांगी, जिस पर संबंधित मंत्रियों ने जवाब दिए।

प्रश्नकाल में उठा अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योगों का मुद्दा

प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेश में अपशिष्ट और विशेष रूप से खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योगों की स्थिति को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने सरकार से पूछा कि राज्य में ऐसे कितने उद्योग संचालित हैं और उनके अपशिष्ट प्रबंधन व निगरानी की क्या व्यवस्था है।

इस पर आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने सदन को बताया कि छत्तीसगढ़ में वर्तमान में 665 ऐसे उद्योग हैं, जो खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रदेश के कुल 19 उद्योगों में ऑनलाइन एमीशन मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि एमीशन मॉनिटरिंग सिस्टम की स्थापना के लिए पृथक से कोई राशि स्वीकृत नहीं की गई है, लेकिन आने वाले दो महीनों के भीतर बाकी उद्योगों में भी ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित किए जाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि केवल तकनीकी निगरानी ही नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारी लगातार उद्योगों का भौतिक निरीक्षण भी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि हजार्डस मेटल और अन्य खतरनाक अपशिष्टों के संबंध में जांच और कार्रवाई लगातार जारी है, ताकि पर्यावरणीय मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा सके।

बालको के वेस्ट मैनेजमेंट पर सरकार का जवाब

नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने बालको से निकलने वाले अपशिष्ट के संबंध में भी सरकार से जानकारी मांगी। इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने बताया कि बालको में चार प्रकार के अपशिष्ट निकलते हैं और उनके निपटान के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।

उन्होंने सदन में कहा कि वहां 60 हजार मीट्रिक टन प्रतिवर्ष रिसाइक्लिंग की व्यवस्था उपलब्ध है। सरकार की ओर से यह संकेत दिया गया कि उद्योगों में अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर व्यवस्था मौजूद है और उसके अनुपालन की निगरानी भी की जा रही है।

छातिम और सप्तपर्णी वृक्षों का मुद्दा सदन में छाया

विधानसभा में छातिम वृक्षों के रोपण का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठा। विधायक सुनील सोनी ने प्रश्नकाल में यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि छातिम वृक्षों के कारण अस्थमा और संक्रमण जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। उन्होंने छातिम वृक्षों के रोपण पर रोक लगाने और पहले से लगे पौधों के संबंध में सरकार का रुख जानना चाहा।

इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल छातिम वृक्षों के रोपण पर किसी प्रकार की औपचारिक रोक नहीं लगाई गई है और वर्तमान में इसे रोकने का कोई प्रस्ताव भी लंबित नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पेड़ आम तौर पर स्वास्थ्य और पर्यावरण के हित में लगाए जाते हैं, लेकिन यदि किसी विशेष प्रजाति से लोगों को नुकसान पहुंचने की बात सामने आती है तो सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय लेगी।

मंत्री ने कहा कि सप्तपर्णी के संबंध में अभी तक विभाग को कोई ठोस जानकारी प्राप्त नहीं हुई है, फिर भी भविष्य में सप्तपर्णी के पौधे नहीं लगाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि जो पौधे पहले से लगाए जा चुके हैं, उनके बारे में आगे चर्चा की जाएगी। साथ ही, पीपल जैसे अन्य उपयोगी और पर्यावरण के अनुकूल वृक्षों के पौधे लगातार लगाए जा रहे हैं।

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भविष्य में छातिम और सप्तपर्णी के पौधे नहीं लगाने की घोषणा

सदन में चर्चा के दौरान मंत्री ओपी चौधरी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि भविष्य में छातिम के वृक्ष नहीं लगाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि सप्तपर्णी के पौधे भी आगे नहीं लगाए जाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कोनोकार्पस वृक्षों के संबंध में भी कहा कि इस प्रजाति को लेकर रिसर्च में कुछ चिंताजनक बातें सामने आई हैं, इसलिए इस पर भी रोक लगाने की दिशा में निर्णय लिया जाएगा।

विधायक सुनील सोनी ने रायपुर में बड़ी संख्या में लगे छातिम के पौधों को लेकर चिंता जताई और इन्हें हटाने की मांग की। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सुझाव दिया कि सुनील सोनी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाए, जो ऐसे पौधों की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

वहीं विधायक धर्मजीत सिंह ने भी तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि हरे-भरे पौधे यदि जिंदा इंसान को ठूंठ बना दें तो ऐसे वृक्षों को काटा जाना चाहिए। इस पर मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि विभाग की ओर से वैज्ञानिकों की टीम बनाई जाएगी, जो इन पौधों के प्रभावों का अध्ययन करेगी। उन्होंने दोहराया कि भविष्य में छातिम के वृक्षों पर प्रतिबंध लगाया जाएगा।

कर्मचारियों के NPS से OPS चयन का मुद्दा भी उठा

सदन में कर्मचारियों से जुड़े पेंशन के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। विधायक पुन्नूलाल मोहले ने प्रश्नकाल में पूछा कि प्रदेश में कितने अधिकारी-कर्मचारियों ने NPS से फिर से OPS का चयन किया है और इस योजना के संचालन की प्रक्रिया क्या है।

इस पर वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब देते हुए बताया कि प्रदेश में कुल 2,91,797 अधिकारी-कर्मचारियों ने NPS से पुनः OPS योजना का विकल्प चुना है। उन्होंने कहा कि इन कर्मचारियों की पेंशन योजना का संचालन छत्तीसगढ़ सिविल सेवा पेंशन नियम, 1976 के प्रावधानों के अनुसार किया जा रहा है।

मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ पेंशन निधि में 15 फरवरी 2026 तक कुल 1,068 करोड़ रुपए जमा किए गए हैं, जिससे 1,120.53 करोड़ रुपए की निधि तैयार हुई है। इस जानकारी के साथ सरकार ने यह संकेत दिया कि OPS में लौटने वाले कर्मचारियों के लिए वित्तीय ढांचा तैयार किया जा रहा है।

मैनपाट के कर्मा एथेनिक रिसोर्ट का मुद्दा भी सदन में उठा

विधानसभा में मैनपाट स्थित कर्मा एथेनिक रिसोर्ट का मुद्दा भी उठा। विधायक रामकुमार टोप्पो ने रिसोर्ट की भूमि, लागत, DPR और निर्माण कार्यों के बारे में सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।

इस पर पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने सदन में बताया कि मैनपाट का कर्मा एथेनिक रिसोर्ट पहाड़ और चट्टान मद के अंतर्गत बनाया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि यह रिसोर्ट 8 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर स्थित है और इसकी लागत 21 करोड़ रुपए से अधिक रही है।

मंत्री ने आगे बताया कि इसके DPR में कुल 32 प्रकार के अलग-अलग कार्य शामिल थे और सभी कार्य समय पर पूरे किए गए। उन्होंने यह भी कहा कि रिसोर्ट के मासिक रखरखाव के लिए जनवरी 2026 में 67 हजार 630 रुपए की राशि खर्च की गई।

कई अहम मुद्दों पर सरकार ने सदन में रखी स्थिति

बजट सत्र के 15वें दिन की कार्यवाही में साफ दिखा कि सदन में पर्यावरण, स्वास्थ्य, उद्योग, पेंशन और पर्यटन जैसे विविध विषयों पर गंभीर चर्चा हुई। एक ओर जहां खतरनाक अपशिष्ट उत्पन्न करने वाले उद्योगों की निगरानी और प्रबंधन को लेकर सरकार ने अपनी स्थिति स्पष्ट की, वहीं छातिम, सप्तपर्णी और कोनोकार्पस जैसे पौधों को लेकर भी भविष्य की नीति का संकेत दिया गया।

साथ ही NPS से OPS में लौटे कर्मचारियों की संख्या और पेंशन निधि की स्थिति ने सरकारी कर्मचारियों से जुड़े बड़े वित्तीय और प्रशासनिक पहलुओं को सामने रखा। मैनपाट के कर्मा एथेनिक रिसोर्ट पर दी गई जानकारी ने पर्यटन परियोजनाओं के खर्च और संरचना को लेकर भी तस्वीर साफ की।

 

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