धान संग्रहण केंद्र में 15 दिनों से 362 ट्रकों की पावती लंबित, गड़बड़ी की आशंका गहराई
गरियाबंद जिले के एकमात्र धान संग्रहण केंद्र कुंडेल में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। देवभोग और गोहरापदर खरीदी केंद्रों से धान भरकर भेजे गए ट्रकों की पावती पिछले 15 दिनों से लंबित पड़ी है। देवभोग ब्रांच मैनेजर अमर सिंह ध्रुव ने अपने उच्च अधिकारियों को लिखित सूचना देकर बताया है कि उनके अधीन आने वाले 10 खरीदी केंद्रों से परिवहन कर भेजे गए 362 ट्रक धान की अब तक पावती नहीं मिली है। गोहरापदर केंद्र से भेजे गए ट्रकों की स्थिति भी लगभग ऐसी ही बताई जा रही है। इससे गड़बड़ी की आशंका और गहरा गई है।
एंट्री में देरी, वाई-फाई और इनवर्टर का सहारा
संग्रहण केंद्र प्रभारी जगमोहन साहू ने एंट्री कार्य में देरी स्वीकार की है। उनका कहना है कि परिवहन कर लाए गए प्रत्येक ट्रक की रिसीविंग की जानकारी ऑनलाइन मॉनिटरिंग ऐप में दर्ज की जा रही है। उन्होंने बताया कि एक माह पहले तक करीब 1300 ट्रकों की एंट्री लंबित थी, जो अब आधी रह गई है।
प्रभारी के मुताबिक पहले ऑपरेटरों के मोबाइल से ऑनलाइन कार्य किया जा रहा था और बिजली बाधित होने पर सिस्टम ठप हो जाता था। अब केंद्र में वाई-फाई और इनवर्टर की व्यवस्था कर दी गई है, जिससे कार्य में तेजी आने का दावा किया गया है।
सूखत के नाम पर भरपाई का दबाव
ट्रकों की रिसीविंग में देरी का सिलसिला नया नहीं है। उठाव और रखरखाव के बीच फंसे खरीदी प्रभारी हिसाब-किताब में गड़बड़ी के शिकार हो जाते हैं। पिछले वर्ष देवभोग के 10 खरीदी केंद्रों में 6753 क्विंटल धान की ‘सूखत’ बताई गई थी। तय मानक से अधिक कमी दिखाए जाने पर करीब 2 करोड़ 22 लाख रुपये की भरपाई करनी पड़ी थी।
बताया जाता है कि यह राशि या तो अतिरिक्त खरीदी दिखाकर या मिलर्स से तालमेल कर उनके कोटे में उठाव दर्शाकर समायोजित की गई। इससे पहले झखरपारा में 60 लाख रुपये के धान गड़बड़ी मामले में खरीदी प्रभारी को जेल भेजा जा चुका है। ऐसे में प्रभारियों में इस बार भी कार्रवाई की आशंका से भय बना हुआ है।
वजन में हेरफेर की चर्चा
सूत्रों के अनुसार पावती लंबित रखने के पीछे वजन में अंतर का खेल भी एक वजह हो सकता है। जीपीएस ट्रैकिंग से ट्रकों की लोकेशन तो दर्ज हो जाती है, लेकिन अंतिम मान्यता संग्रहण केंद्र में हुए वजन को ही दी जाती है।
देवभोग–गोहरापदर क्षेत्र से कुंडेल संग्रहण केंद्र की दूरी 100 किलोमीटर से अधिक है। स्थानीय धर्मकांटा को मान्यता नहीं दी गई है। ऐसे में संग्रहण केंद्र में कम वजन दिखाकर खरीदी प्रभारियों पर शॉर्टेज का दबाव बनाया जाता है और भरपाई के नाम पर कथित सेटिंग की परंपरा की चर्चा होती रही है।
गड़बड़ी छिपाने की आशंका
प्रदेश के अन्य जिलों में हुए मामलों को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि पावती रोककर किसी संभावित शॉर्टेज या गड़बड़ी को छिपाने की कोशिश तो नहीं की जा रही। पावती जारी होने का मतलब है प्राप्त मात्रा की ऑनलाइन एंट्री। यदि सटीक आंकड़े अपलोड हुए और भौतिक सत्यापन हुआ तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
