नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन करीब: कांकेर में बचे सिर्फ 24 नक्सली, चंदर और रूपी मोस्ट वांटेड
नक्सलवाद
कांकेर: नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की तय समय-सीमा नजदीक आते ही छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। केंद्र सरकार ने राज्य के छह जिलों को नक्सल प्रभावित घोषित किया है, जिनमें कांकेर, बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा और गरियाबंद शामिल हैं। हालांकि बस्तर संभाग में अब केवल पांच जिले ही नक्सल प्रभावित रह गए हैं।
कांकेर में फोर्स का दबदबा, ऑपरेशन लगातार जारी
कांकेर जिले में सुरक्षा बलों ने बीते महीनों में नक्सलियों के खिलाफ कई सफल अभियान चलाए हैं। वर्ष 2025 में जहां 51 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, वहीं 10 नक्सली मुठभेड़ों में मारे गए। इसके बावजूद कांकेर अभी भी संवेदनशील बना हुआ है। पुलिस के अनुसार, जिले के जंगलों में फिलहाल करीब 24 हथियारबंद नक्सली सक्रिय हैं, जिनकी तलाश में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं।
इनामी नक्सली नेता भी सक्रिय
कांकेर के एसपी निखिल राखेचा के मुताबिक सक्रिय नक्सलियों में डीवीसीएम रैंक का नक्सली नेता चंदर कत्लाम भी शामिल है, जिस पर 8 लाख रुपये का इनाम घोषित है। उसके साथ एसीएम रूपी भी सक्रिय बताई जा रही है। बताया जाता है कि इस 24 सदस्यीय नक्सली दल में 11 नक्सली कंपनी नंबर 5 से जुड़े हैं, जबकि बाकी परतापुर और रावघाट एरिया कमेटी के सदस्य हैं।
गढ़चिरौली एनकाउंटर के बाद भी नहीं टूटा नेटवर्क
हाल ही में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में हुई मुठभेड़ में कांकेर में सक्रिय नक्सली फागू मारा गया था, जो कंपनी नंबर 5 का कमांडर था। इसके बाद पुलिस को उम्मीद थी कि शेष नक्सली सरेंडर करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नतीजतन, फोर्स ने ऑपरेशन और तेज कर दिए हैं।
सीमावर्ती इलाकों में नक्सलियों की लुकाछुपी
कांकेर की सीमाएं माड़ क्षेत्र और गढ़चिरौली से लगती हैं। लगातार कार्रवाई से दबाव बढ़ने पर नक्सली कभी नारायणपुर तो कभी महाराष्ट्र की ओर रुख कर रहे हैं। हालांकि अब संयुक्त ऑपरेशन के चलते उनकी घेराबंदी लगभग पूरी हो चुकी है और लंबे समय तक छिपे रहना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।
बदले की भावना में भटक रहे नक्सली
सूत्रों के मुताबिक कुछ नक्सली अपने मारे गए साथियों का बदला लेने के इरादे से जंगलों में सक्रिय हैं। इनमें एसीएम रूपी का नाम भी सामने आ रहा है, जो कुख्यात नक्सली विजय रेड्डी की पत्नी बताई जाती है। विजय रेड्डी को बीते साल मोहला-मानपुर के जंगलों में मुठभेड़ में मार गिराया गया था। इसके बाद से रूपी न तो खुद सरेंडर कर रही है और न ही अपने साथियों को ऐसा करने दे रही है।
31 मार्च 2026 से पहले होगा खात्मा
एसपी निखिल राखेचा का कहना है कि कांकेर जिले में अब गिने-चुने नक्सली ही बचे हैं। यदि वे आत्मसमर्पण करना चाहते हैं तो उनके लिए रास्ता खुला है, लेकिन ऐसा न करने पर सुरक्षा बल कार्रवाई जारी रखेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से पहले क्षेत्र से नक्सलवाद का पूरी तरह सफाया कर दिया जाएगा।
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