धान खरीदी और टोकन व्यवस्था पर संसद में हंगामा, किसान आत्महत्या पर Phulo Devi Netam ने जताई चिंता
राज्यसभा सांसद Phulo Devi Netam ने संसद में विशेष उल्लेख के माध्यम से छत्तीसगढ़ में किसानों द्वारा आत्महत्या के गंभीर मामले को उठाया। उन्होंने कहा कि यह बेहद चिंताजनक स्थिति है कि कृषि प्रधान देश में किसान आर्थिक तंगी के कारण आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं।
सांसद नेताम ने अपने वक्तव्य में कहा कि किसानों की आत्महत्या के पीछे सबसे बड़ा कारण आर्थिक दबाव है। किसान खेती के लिए बैंकों और साहूकारों से कर्ज लेते हैं, लेकिन फसल खराब होने या उचित दाम नहीं मिलने की स्थिति में वे कर्ज नहीं चुका पाते। बढ़ते कर्ज और आर्थिक संकट के चलते कई किसान हताश होकर आत्महत्या जैसा कदम उठा लेते हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि किसानों के कर्ज में डूबने का एक और बड़ा कारण धान खरीदी और टोकन वितरण की अव्यवस्था है। जब किसान अपनी उपज लेकर खरीद केंद्रों तक पहुंचते हैं तो कई दिनों तक उन्हें टोकन नहीं मिल पाता। और जब सरकारी खरीदी बंद हो जाती है, तब मजबूरी में उन्हें अपनी उपज कम कीमत पर खुले बाजार में बेचनी पड़ती है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है और वे कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं।
नेताम ने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के महासमुंद, कोरबा, मोहला-मानपुर और जांजगीर-चांपा जिलों का उल्लेख करते हुए कहा कि धान खरीदी नहीं होने और टोकन नहीं मिलने की समस्या के कारण कई किसानों ने आत्महत्या कर ली। उन्होंने इस स्थिति को अत्यंत दुखद और प्रशासनिक विफलता का परिणाम बताया।
राज्यसभा में उन्होंने मांग रखी कि देश में अंतिम किसान तक टोकन वितरण और उपज खरीदी की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुनिश्चित बनाया जाए। साथ ही, जिन किसानों ने टोकन नहीं मिलने और खरीदी में देरी के कारण आत्महत्या की है, उनके पूरे कर्ज को माफ किया जाए और पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।
सांसद ने केंद्र सरकार से अपील की कि इस गंभीर मुद्दे पर संवेदनशीलता के साथ विचार करते हुए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी भी किसान को ऐसी दुखद परिस्थिति का सामना न करना पड़े।
