लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव, 118 सांसदों का समर्थन

नई दिल्ली। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है। मंगलवार को कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की अगुआई में यह प्रस्ताव लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव के समर्थन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके समेत कई विपक्षी दलों के कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस प्रस्ताव में विपक्ष के साथ नहीं है।

प्रस्ताव सौंपने की प्रक्रिया में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई, मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश और सांसद मोहम्मद जावेद शामिल रहे। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा में स्पीकर की कार्यशैली निष्पक्ष नहीं है और विपक्षी नेताओं को पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों को स्वतंत्र रूप से बोलने की अनुमति मिलती है।

2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण से जुड़े मुद्दे को उठाने की अनुमति नहीं दिए जाने पर विवाद हुआ था। इसके अलावा सदन की अवमानना के मामले में आठ विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर भी विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया था। इन घटनाओं के बाद सदन में लगातार गतिरोध बना रहा।

क्या है स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया?

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 (c) के तहत लोकसभा स्पीकर को पद से हटाने के लिए सदन में प्रस्ताव लाया जा सकता है। इसके लिए कम से कम 14 दिन का पूर्व नोटिस देना अनिवार्य होता है।

  • प्रस्ताव को सूचीबद्ध कर चर्चा के लिए रखा जाता है।
  • चर्चा के बाद मतदान कराया जाता है।
  • यदि सदन के उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का बहुमत प्रस्ताव के पक्ष में होता है, तो स्पीकर को पद छोड़ना पड़ता है।
  • प्रस्ताव पर विचार के दौरान स्पीकर स्वयं पीठासीन नहीं होते; उनकी जगह डिप्टी स्पीकर या सदन द्वारा नामित सदस्य अध्यक्षता करता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़ी संख्या में सांसदों के समर्थन के चलते यह प्रस्ताव संसदीय राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम साबित हो सकता है। अब यह देखना होगा कि प्रस्ताव को कब चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया जाता है और सदन में इस पर क्या रुख सामने आता है।

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