Vladimir Putin in Epstein’s Files: एपस्टीन फाइल्स में व्लादिमीर पुतिन का नाम, 1005 बार हुआ जिक्र
Vladimir Putin in Epstein’s Files: अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा हाल ही में सार्वजनिक की गई जेफ्री एपस्टीन फाइलों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। लाखों पन्नों के इन दस्तावेजों में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का नाम कम से कम 1005 बार सामने आया है। हालांकि, इन फाइलों में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि पुतिन और एपस्टीन के बीच कभी सीधी मुलाकात हुई थी।
क्यों आया पुतिन का नाम इतनी बार?
रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन का अधिकांश उल्लेख उन न्यूज क्लिपिंग्स और मीडिया रिपोर्ट्स में है जो जेफ्री एपस्टीन को भेजी जाती थीं। इसके अलावा कुछ ईमेल्स में एपस्टीन द्वारा पुतिन तक पहुंच बनाने और उनसे मुलाकात कराने की कोशिशों का जिक्र है, लेकिन ये प्रयास सफल हुए हों—इसका कोई प्रमाण दस्तावेजों में मौजूद नहीं है।
रूसी अधिकारियों से संपर्क की कोशिशें
दस्तावेज बताते हैं कि एपस्टीन ने रूसी अधिकारियों, पूर्व राजदूतों और कथित तौर पर FSB (रूस की खुफिया एजेंसी) से जुड़े लोगों से संपर्क साधने की कोशिश की थी। इसी वजह से अब इस पूरे मामले को लेकर हनीट्रैप और अंतरराष्ट्रीय जासूसी से जुड़ी अटकलें तेज हो गई हैं।
रूसी राजदूत विटाली चर्किन से नजदीकी
एपस्टीन के संबंध न्यूयॉर्क में रूस के पूर्व राजदूत विटाली चर्किन से भी बताए गए हैं। दस्तावेजों के अनुसार, दोनों की नियमित मुलाकात होती थी। एपस्टीन ने चर्किन के बेटे मैक्सिम को न्यूयॉर्क की एक प्रमुख वेल्थ मैनेजमेंट कंपनी में नौकरी दिलाने का प्रस्ताव भी दिया था
2017 में चर्किन की अचानक मौत के बाद एपस्टीन ने रूस से संपर्क बनाए रखने के लिए नए चैनल तलाशने शुरू किए।
लावरोव तक संदेश भिजवाने की कोशिश
जून 2018 में एपस्टीन ने नॉर्वे के वरिष्ठ नेता थोरबजर्न जागलैंड को एक ईमेल भेजा, जो उस समय काउंसिल ऑफ यूरोप के सेक्रेटरी जनरल थे। ईमेल में एपस्टीन ने सुझाव दिया कि पुतिन, रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से कहें कि वे उससे बातचीत कर जानकारी हासिल करें। जवाब में जागलैंड ने कहा था कि वह यह बात लावरोव के असिस्टेंट तक पहुंचा देंगे।
निवेश, जासूसी और रूस कनेक्शन
रिपोर्ट्स के अनुसार, एपस्टीन के संबंध सर्गेई बेल्याकोव जैसे अधिकारियों से भी थे, जिनके कथित लिंक FSB से बताए जाते हैं। वह सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम में भी शामिल हुआ था और रूस में पश्चिमी निवेश को लेकर सलाह देता था। इतना ही नहीं, एपस्टीन ने 2019 तक रूस का वीजा पाने की भी कोशिश की थी।
पोलैंड ने दिए जांच के आदेश
इन खुलासों के बाद पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने एपस्टीन और रूसी खुफिया एजेंसियों के संभावित संबंधों की जांच के आदेश दिए हैं। टस्क ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सामने आ रहे संकेत इस ओर इशारा करते हैं कि यह बाल यौन शोषण घोटाला रूसी खुफिया एजेंसियों से जुड़ा हो सकता है।
क्रेमलिन का पलटवार
वहीं, रूस ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि एपस्टीन और रूसी जासूसी के बीच संबंधों की बातें गंभीरता से लेने लायक नहीं हैं। उन्होंने इसे अटकलों का पुलिंदा बताते हुए कहा कि ऐसे सिद्धांतों पर समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं है।
