Shankaracharya Controversy: शंकराचार्य विवाद पर सियासी और प्रशासनिक घमासान, उमा भारती ने दिया समर्थन, अफसरों के इस्तीफों से बढ़ी सरकार की मुश्किल

Shankaracharya Controversy: माघ मेला प्रशासन और शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बीच चल रहा विवाद अब सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। यह मामला सिर्फ संत समाज तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अब राजनीति और नौकरशाही में भी हलचल पैदा कर चुका है। बीजेपी की फायरब्रांड नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने शंकराचार्य का खुलकर समर्थन करते हुए प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

उमा भारती ने कहा कि शंकराचार्य से सबूत मांगकर माघ मेला प्रशासन ने मर्यादा का उल्लंघन किया है। उनके इस बयान पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक भी पहुंचाई जानी चाहिए।

सीएम योगी से खून से लिखा गया पत्र

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर केस के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी बाबा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खून से पत्र लिखकर मांग की है कि शंकराचार्य को सम्मानपूर्वक गंगा स्नान कराया जाए। साथ ही उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को माफी मांगने का निर्देश देने की भी अपील की है।

अफसरों के इस्तीफे से बढ़ा विवाद

माघ मेला प्रशासन और शंकराचार्य के बीच बीते 10 दिनों से चल रहा टकराव अब ब्यूरोक्रेसी तक पहुंच चुका है। अयोध्या में तैनात जीएसटी डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी के समर्थन में इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों से वे आहत हैं और अब और अपमान सहन नहीं कर सकते।

वहीं, इससे पहले बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य के समर्थन में 26 जनवरी को इस्तीफा दिया था। हालांकि, सरकार ने उनका इस्तीफा नामंजूर कर उन्हें निलंबित कर दिया और पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए।

संत समाज में भी मतभेद

इस विवाद पर संत समाज भी बंटा नजर आ रहा है। अयोध्या छावनी धाम के परमहंस महाराज ने अविमुक्तेश्वरानंद और सतुआ बाबा पर माघ मेले को बदनाम करने का आरोप लगाया। उन्होंने दोनों संतों की माघ मेले में एंट्री पर प्रतिबंध लगाने की मांग की और यहां तक कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया जाना चाहिए।

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद

18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में बैठकर गंगा स्नान के लिए जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोकते हुए पैदल जाने को कहा, जिस पर विरोध हुआ। आरोप है कि इस दौरान शिष्यों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट हुई। इसके बाद प्रशासन की ओर से दो नोटिस जारी किए गए—एक शंकराचार्य की पदवी को लेकर और दूसरा मौनी अमावस्या के दिन कथित हंगामे को लेकर। चेतावनी दी गई कि उन्हें माघ मेले से प्रतिबंधित किया जा सकता है।

शंकराचार्य ने दोनों नोटिसों का जवाब दिया, लेकिन इसके बाद विवाद और गहराता चला गया। अब यह मामला प्रशासन, संत समाज, राजनीति और नौकरशाही—चारों स्तरों पर टकराव का रूप ले चुका है।

Youthwings