Shankaracharya Title Legal Row: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के ‘शंकराचार्य’ दावे पर कानूनी घेरा, प्रशासन ने 24 घंटे में जवाब मांगा
Shankaracharya Title Legal Row: प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा खुद को ‘ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य’ बताने पर कड़ा रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले का हवाला देते हुए प्रशासन ने उन्हें 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया है। प्राधिकरण का कहना है कि शीर्ष अदालत के स्थगन आदेश के बावजूद इस पद का सार्वजनिक उपयोग न्यायालय की अवहेलना की श्रेणी में आ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला, नोटिस जारी
माघ मेला प्राधिकरण द्वारा जारी औपचारिक नोटिस में सिविल अपील संख्या 3010/2020 और 3011/2020 का उल्लेख किया गया है। नोटिस के अनुसार, 14 अक्टूबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिष्पीठ से जुड़े किसी भी नए पट्टाभिषेक पर रोक लगा दी थी। जब तक इन अपीलों पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक किसी को भी शंकराचार्य घोषित करने पर प्रतिबंध है।
‘शंकराचार्य’ संबोधन पर क्यों उठे सवाल?
प्रशासन का कहना है कि माघ मेला 2025-26 के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और सूचना बोर्डों पर उन्हें ‘ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य’ दर्शाया जा रहा है। नोटिस में सवाल उठाया गया है कि जब अदालत का आदेश प्रभावी है, तो ऐसे में वे इस पद का प्रचार किस कानूनी आधार पर कर रहे हैं। इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना का संकेत माना गया है।
विधिक राय और जमीन आवंटन पर आपत्ति
नोटिस में विभिन्न विधिक विशेषज्ञों की राय का भी हवाला दिया गया है। कानूनी सलाह के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य मानकर जमीन का आवंटन करना या उन्हें इस पद की आधिकारिक मान्यता देना सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हो सकता है। इसी कारण प्रशासन ने माघ मेले में उनके प्रचार और पद-प्रयोग पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है।
24 घंटे की मोहलत, कार्रवाई के संकेत
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की स्थिति में कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। अब सभी की नजरें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के जवाब पर टिकी हैं, जिससे यह तय होगा कि यह मामला आगे किस दिशा में बढ़ता है।
