Donald Trump का फिर छलका नोबेल शांति पुरस्कार का दर्द, कहा- ‘8 युद्ध रोके… मुझे 8 पुरस्कार मिलने चाहिए थे’

वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने का दर्द छलका दिया है। अपने दूसरे कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर व्हाइट हाउस में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने 10 महीनों में भारत-पाकिस्तान समेत 8 युद्ध रोके और दुनिया को न्यूक्लियर वॉर से बचाया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष मूल्यांकन होने पर उन्हें हर युद्ध रोकने के लिए अलग-अलग नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था।

 

ट्रंप ने कहा, “मैंने 8 युद्ध रोके, लाखों लोगों की जान बचाई। भारत-पाकिस्तान दोनों न्यूक्लियर पावर हैं। हालात बेहद गंभीर थे, परमाणु युद्ध तक जा सकते थे, लेकिन दुनिया बच गई। मुझे हर युद्ध के लिए नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए था।” उन्होंने नॉर्वे की सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने जानबूझकर पुरस्कार नहीं दिया। ट्रंप ने कहा, “नॉर्वे सब कुछ नियंत्रित करता है। कोई ये न कहे कि नॉर्वे इसे नियंत्रित नहीं करता।”

 

ट्रंप ने वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो की तारीफ की, जिन्होंने उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार ‘पेश’ किया था। ट्रंप ने कहा, “मारिया ने माना कि पुरस्कार का असली हकदार मैं हूं। उनके इस कदम के लिए मैं उनका सम्मान करता हूं।”

 

नॉर्वे पीएम का जवाब

नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गाहर स्टोर ने स्पष्ट किया कि नोबेल शांति पुरस्कार देने का फैसला नॉर्वे सरकार का नहीं, बल्कि नोबेल समिति का होता है। उन्होंने कहा, “सरकार का इस प्रक्रिया से कोई लेना-देना नहीं है।”

 

नोबेल फाउंडेशन ने भी साफ किया

नोबेल फाउंडेशन ने बयान जारी कर कहा कि कोई पुरस्कार विजेता इसे किसी अन्य को ट्रांसफर या साझा नहीं कर सकता।

ट्रंप का नॉर्वे पीएम को पहले मैसेज

ट्रंप ने पहले भी नॉर्वे के प्रधानमंत्री को मैसेज भेजा था: “प्रिय जोनास: चूंकि आपके देश ने मुझे 8 युद्ध रोकने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार नहीं दिया, इसलिए अब सिर्फ शांति के बारे में सोचने की मेरी कोई मजबूरी नहीं है। हालांकि शांति हमेशा मेरी मुख्य प्राथमिकता रहेगी, लेकिन अब मैं अमेरिका के लिए क्या अच्छा और सही है, उसी के बारे में सोचूंगा।”

 

अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ प्रदर्शन

दूसरे कार्यकाल के एक साल पूरे होने पर अमेरिका के कई शहरों में ट्रंप के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हुए। एक्टिविस्ट और आम लोग उनकी टैरिफ नीति, अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, WTO, UN और NATO से दूरी बनाने जैसे फैसलों से नाराज दिखे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इन नीतियों ने अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाया है। लोगों ने पोस्टर, पुतले और नारों के जरिए विरोध दर्ज किया।

Youthwings