झीरम घाटी कांड पर विवादित बयान, कांग्रेस नेता विकास तिवारी को राज्यसभा सांसद प्रतिनिधि पद से भी हटाए गए

रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में अनुशासनहीनता के मामले में नेता विकास तिवारी को एक के बाद एक बड़े झटके लग रहे हैं। झीरम घाटी नक्सल कांड (2013) को लेकर पार्टी लाइन से हटकर दिए गए बयानों के कारण पहले उन्हें वरिष्ठ प्रवक्ता पद से हटाया गया, फिर कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से 6 वर्ष के लिए निष्कासित कर दिया गया। अब ताजा कार्रवाई में उन्हें राज्यसभा सांसद रंजीता रंजन के सांसद प्रतिनिधि पद से भी मुक्त कर दिया गया है।

क्या था विवाद?

विकास तिवारी ने झीरम घाटी नक्सल हमले की जांच के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित भाजपा नेताओं का नार्को टेस्ट कराने की सार्वजनिक मांग की थी। उन्होंने इस संबंध में गठित न्यायिक जांच आयोग को पत्र भी लिखा। पार्टी ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना और कहा कि तिवारी ने वरिष्ठ नेताओं के नाम मीडिया में जोड़कर प्रचारित किया, जो कांग्रेस की आधिकारिक लाइन का स्पष्ट उल्लंघन है।

कार्रवाई का क्रम

बयान के तुरंत बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर विकास तिवारी को वरिष्ठ प्रवक्ता पद से हटा दिया गया।

उन्हें तीन दिन के अंदर लिखित स्पष्टीकरण देने का नोटिस जारी किया गया।

स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने पर कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया गया।

अब राज्यसभा सांसद रंजीता रंजन के सांसद प्रतिनिधि पद से भी हटा दिया गया।

छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि पार्टी लाइन से हटकर कोई भी बयान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। झीरम घाटी कांड कांग्रेस के लिए बेहद संवेदनशील मुद्दा रहा है, जिसमें कई बड़े नेता शहीद हुए थे। पार्टी का मानना है कि ऐसे बयानों से संगठन की एकजुटता को नुकसान पहुंचता है और विपक्ष को फायदा होता है।

विकास तिवारी की लगातार हो रही कार्रवाइयों से प्रदेश कांग्रेस में अनुशासन का सख्त संदेश गया है। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में आगे कोई नरमी बरतने की गुंजाइश नहीं है। दूसरी ओर, विकास तिवारी की ओर से अभी तक इस कार्रवाई पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

झीरम घाटी कांड को लेकर राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर बढ़ गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर और बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

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