हाईकोर्ट में न्यायिक व्यवस्था में बदलाव: 2 जनवरी 2026 से नया रोस्टर लागू, 4 डिवीजन बेंच और 2 स्पेशल बेंच गठित

हाईकोर्ट

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रायपुर: शीतकालीन अवकाश समाप्त होने के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में 2 जनवरी 2026 से नया न्यायिक रोस्टर प्रभाव में आ जाएगा। नए रोस्टर के तहत विभिन्न श्रेणियों के मामलों की सुनवाई के लिए बेंचों का पुनर्गठन किया गया है। इससे लंबित प्रकरणों के शीघ्र निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है।

4 डिवीजन बेंच और 2 स्पेशल बेंच गठित

नए रोस्टर के अनुसार हाईकोर्ट में कुल चार डिवीजन बेंच और दो स्पेशल बेंच का गठन किया गया है। पहली डिवीजन बेंच में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा शामिल होंगे। यह बेंच जनहित याचिकाओं (PIL), रिट अपील और हैबियस कॉर्पस से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी।

दूसरी और तीसरी डिवीजन बेंच को मिली अहम जिम्मेदारी

दूसरी डिवीजन बेंच में जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजय जायसवाल होंगे। यह बेंच उन आपराधिक मामलों की सुनवाई करेगी जो अन्य डिवीजन बेंच के अंतर्गत नहीं आते, साथ ही फैमिली मामलों की फर्स्ट अपील और रिट याचिकाएं भी यहीं सुनी जाएंगी।

वहीं तीसरी डिवीजन बेंच जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की होगी। इस बेंच के अंतर्गत सिविल मामले, कंपनी अपील, टैक्स प्रकरण, इक्विटल अपील और डिवीजन बेंच के रिट मामले रखे गए हैं।

चौथी डिवीजन बेंच को पुराने मामलों की सुनवाई

चौथी डिवीजन बेंच में जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल शामिल होंगे। यह बेंच कमर्शियल अपीलेट डिवीजन बेंच के मामले, वर्ष 2016 से लंबित एक्विटल अपील और संबंधित रिट याचिकाओं की सुनवाई करेगी।

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14 सिंगल बेंचों को सौंपे गए अलग-अलग प्रकरण

नए रोस्टर के तहत कुल 14 सिंगल बेंच गठित की गई हैं। इनमें जस्टिस पार्थ प्रतिम साहू, जस्टिस दीपक तिवारी, जस्टिस राकेश मोहन पाण्डेय, जस्टिस बीडी गुरु, जस्टिस सचिन सिंह राजपूत और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल सहित अन्य न्यायाधीश शामिल हैं। सभी सिंगल बेंचों को विभिन्न श्रेणियों के मामलों की सुनवाई की जिम्मेदारी दी गई है।

लंबित मामलों के निपटारे को मिलेगी गति

हाईकोर्ट प्रशासन का मानना है कि नए रोस्टर के लागू होने से मामलों के वितरण में संतुलन बनेगा और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी। इससे लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे को भी रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

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