Raipur Rave Parties: रायपुर की रातों का काला सच, पुलिस की कार्रवाई के बाद उठे बड़े सवाल
रायपुर। Raipur Rave Parties: राजधानी में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नए साल से पहले ही जश्न की आड़ में चल रही अवैध पार्टियों पर पुलिस की नजर पड़ी है। विधानसभा थाना पुलिस ने देर रात एक फार्म हाउस पर छापा मारकर 21 युवक-युवतियों को हिरासत में लिया, जहां रेव पार्टी चलने की सूचना थी। इस कार्रवाई के बाद रायपुर की रातों में पनप रहे एक समानांतर पार्टी नेटवर्क पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, बीते करीब 10 वर्षों से रायपुर में कुछ चुनिंदा जगहों पर ऐसी पार्टियां आयोजित की जा रही हैं, जिनकी जानकारी आम लोगों तक नहीं पहुंच पाती। कॉलेज स्टूडेंट्स, हाई-फाई युवा और सोशल मीडिया के जरिए चुने गए लोगों को इन आयोजनों में बुलाया जाता है। धीरे-धीरे यह नेटवर्क नशे, अवैध गतिविधियों और ब्लैकमेलिंग तक फैलता चला जाता है।
पूल पार्टी से होती है शुरुआत
जानकारी के अनुसार, इस नेटवर्क की पहली कड़ी पूल पार्टी और रेन डांस जैसी गतिविधियों से शुरू होती है। फार्म हाउस या वाटर पार्क में तेज म्यूजिक और शराब के बीच आयोजन किए जाते हैं। एंट्री फीस सामान्य तौर पर 500 रुपये से शुरू होती है, जबकि खाने-पीने की सुविधा के साथ खर्च 3000 रुपये तक पहुंच जाता है। यहीं से युवाओं को आगे के आयोजनों की ओर आकर्षित किया जाता है।
सैटरडे नाइट पार्टियां और क्लब कल्चर
इसके बाद सैटरडे नाइट पार्टियों का दौर आता है। शहर के क्लब, पब और लाउंज में महंगी ड्रिंक्स और तेज म्यूजिक के बीच एंट्री चार्ज काफी ज्यादा रखा जाता है। बताया जाता है कि इन आयोजनों में ड्रिंक सेल बढ़ाने के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं, जिससे युवाओं पर खर्च का दबाव बढ़ता है।
रेव पार्टियां, सबसे खतरनाक कड़ी
सबसे संवेदनशील और खतरनाक मानी जाती हैं रेव पार्टियां। ये आमतौर पर शहर से बाहर फार्म हाउस या होटलों के निजी कमरों में देर रात शुरू होती हैं। यहां अवैध नशे की उपलब्धता की शिकायतें सामने आती रही हैं। एंट्री किसी टिकट से नहीं, बल्कि नशे की खरीद से तय होती है।
ऑफ्टर पार्टी और अवैध गतिविधियां
रेव पार्टी के बाद ऑफ्टर पार्टी का सिलसिला शुरू होता है, जहां अवैध गतिविधियों की आशंका और भी बढ़ जाती है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यहीं से कई युवा गलत रास्तों में फंसते चले जाते हैं।
कौन चला रहा है नेटवर्क?
बताया जा रहा है कि इन आयोजनों की प्लानिंग स्थानीय स्तर पर नहीं, बल्कि दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों से जुड़े कुछ ग्रुप्स करते हैं। स्थानीय एजेंट सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को टारगेट कर इन आयोजनों तक पहुंचाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जश्न मनाना गलत नहीं, लेकिन कानून और सामाजिक मर्यादा से बाहर जाकर किया गया ऐसा उत्सव युवाओं और समाज दोनों के लिए खतरा बन सकता है।
