Ajay Chandrakar in Vidhan Sabha: “आप मुझे सदन का नियम मत सिखाओ” — विधानसभा में अजय चंद्राकर का तीखा तेवर

Ajay Chandrakar in Vidhan Sabha: छत्तीसगढ़ विधानसभा का शीतकालीन सत्र आज से शुरू हो गया। सत्र के पहले ही दिन विजन डॉक्यूमेंट 2047 को लेकर सदन में तीखी बहस देखने को मिली। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विजन डॉक्यूमेंट पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में निर्मित एल्यूमिनियम का उपयोग चंद्रयान, मंगलयान, तेजस फाइटर और विभिन्न रॉकेट्स में किया जा रहा है। उन्होंने बेहतर प्रस्तुति के लिए विधानसभा में प्रोजेक्टर लगाने की भी मांग की।

इसके बाद विजन डॉक्यूमेंट 2047 पर चर्चा के लिए विधायक अजय चंद्राकर को आमंत्रित किया गया। अजय चंद्राकर ने अपने संबोधन की शुरुआत प्रसिद्ध सूफी कवि रूमी की कविता से करते हुए सरकार के विजन डॉक्यूमेंट पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि दस्तावेज़ में गरीबी उन्मूलन, महिला सशक्तिकरण और कानून-व्यवस्था जैसे अहम विषयों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने कहा कि अगर नीतियां बनती हैं तो उनका जमीन पर असर भी दिखना चाहिए।

रोजगार के मुद्दे पर बोलते हुए अजय चंद्राकर ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि रोजगार की परिभाषा क्या है। सरकार को तय करना चाहिए कि किसे रोजगार माना जाएगा, क्योंकि यह छत्तीसगढ़ के लिए बेहद जरूरी है।

कृषि क्षेत्र पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2023–24 के आर्थिक सर्वेक्षण में सिंचाई का आंकड़ा 37 प्रतिशत था, जो 2024–25 में घटकर 34 प्रतिशत हो गया। उन्होंने पूछा कि अरबों रुपये खर्च होने के बावजूद सिंचाई प्रतिशत में गिरावट कैसे आई।

बीज, दुग्ध और चारा उत्पादन पर भी अजय चंद्राकर ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य किसी भी प्रकार के बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर नहीं है, जबकि दुग्ध उत्पादन में योगदान केवल 6 से 7 प्रतिशत है। चारा उत्पादन की कोई ठोस नीति नहीं है। उन्होंने कहा कि दुग्ध उत्पादन, अंडा उत्पादन और मधुमक्खी पालन जैसे सहयोगी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।

वित्तीय असंतुलन का मुद्दा उठाते हुए अजय चंद्राकर ने कहा कि प्रदेश के 97 प्रतिशत लोगों के लिए ठोस नीति बननी चाहिए। रायगढ़, कोरबा और दंतेवाड़ा जैसे जिलों में फंड की भरमार है, जबकि अन्य जिलों को पर्याप्त संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं।

इसी दौरान मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने अजय चंद्राकर के बयान पर आपत्ति जताते हुए व्यक्तिगत आरोप लगाने से बचने और संबंधित अंश को कार्यवाही से हटाने की मांग की। इस पर अजय चंद्राकर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आप मुझे सदन का नियम मत सिखाओ।” जवाब में मंत्री जायसवाल ने कहा कि वे भी दो बार विधायक रह चुके हैं और उन्हें भी नियम-प्रक्रिया की जानकारी है।

अपने संबोधन के अंत में अजय चंद्राकर ने एनीमिया उन्मूलन अभियान को नीति में शामिल करने की बात कही। उन्होंने मेकाहारा में पेट स्कैन मशीन खरीदे जाने का जिक्र करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य मध्य भारत का सबसे बड़ा कैंसर अस्पताल विकसित करना था। उन्होंने कहा कि यदि इसमें किसी प्रकार का भ्रष्टाचार हुआ है, तो वे सजा भुगतने के लिए भी तैयार हैं।

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