नेपाल ने फिर छेड़ा सीमा विवाद : नए 100 रुपये नोट पर छापा विवादित नक्शा, कालापानी-लिपुलेख को बताया अपना

काठमांडू/नई दिल्ली, 28 नवंबर 2025। नेपाल ने एक बार फिर भारत के साथ सीमा विवाद को ताजा कर दिया है। नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) ने गुरुवार को 100 नेपाली रुपये का नया नोट जारी किया, जिसमें देश का संशोधित नक्शा छपा है। इस नक्शे में कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा जैसे विवादित क्षेत्रों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है, जिन्हें भारत उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले का अभिन्न अंग मानता है। भारत ने इस कदम को ‘एकतरफा’ और ‘कृत्रिम विस्तार’ करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई है, कहा कि ऐसी कार्रवाइयां जमीन की हकीकत नहीं बदल सकतीं।

 

2020 का पुराना विवाद फिर से गरमाया

यह कदम मई 2020 के उस फैसले से जुड़ा है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार ने संसद से संविधान संशोधन पारित कराकर इन क्षेत्रों को नेपाल के नक्शे में शामिल किया था। भारत ने तब इसे ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ बताते हुए खारिज कर दिया था। अब नए नोट पर उसी विवादित नक्शे को जगह देकर नेपाल अपनी जिद पर अड़ा नजर आ रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “नेपाल के एकतरफा कदम जमीन की सच्चाई नहीं बदल सकते।” नोट पर पूर्व गवर्नर महा प्रसाद अधिकारी के हस्ताक्षर हैं और जारी करने की तारीख 2081 बीएस (2024) अंकित है।

 

नोट की डिजाइन और खासियतें

नया 100 रुपये का नोट पूरी तरह नए डिजाइन में आया है। नोट के आगे की तरफ बाईं ओर माउंट एवरेस्ट की तस्वीर, दाईं ओर राष्ट्रीय फूल रोडोडेंड्रॉन का वॉटरमार्क है। बैकग्राउंड में हल्का हरा रंग का नेपाल का संशोधित नक्शा छपा है, जिसमें विवादित इलाके शामिल हैं। इसके अलावा अशोक स्तंभ भी है, जिस पर लिखा है ‘लुंबिनी, भगवान बुद्ध का जन्मस्थान’। नोट के पीछे एक सींग वाले गैंडे (राइनो) की तस्वीर है। नेत्रहीनों की सुविधा के लिए इसमें काला बिंदु भी है। यह नोट चीनी कंपनी ‘चाइना बैंकनोट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन’ द्वारा छापा गया है, जिसकी लागत करीब 12 अरब नेपाली रुपये (लगभग 90 करोड़ रुपये) है। एनआरबी के प्रवक्ता ने कहा, “यह नक्शा पुराने 100 रुपये नोट पर भी था, लेकिन 2020 के सरकारी फैसले के मुताबिक अपडेट किया गया है। अन्य मूल्यवर्गों (10, 50, 500, 1000 रुपये) के नोटों पर नक्शा नहीं है।”

 

भारत का सख्त रुख: सीमा पर सतर्कता बढ़ी

भारतीय विदेश मंत्रालय ने नेपाल के इस कदम को ‘अस्वीकार्य’ बताया है। प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “ये क्षेत्र भारत के अभिन्न हिस्से हैं और नेपाल का दावा ऐतिहासिक साक्ष्यों के खिलाफ है।” उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में सीमा व्यापारियों ने भी नोटों को सीमा पार करने से रोके जाने की चेतावनी दी है। 1816 के सुगौली संधि के अनुसार, काली नदी पूर्वी क्षेत्र नेपाल की सीमा है, लेकिन स्रोत को लेकर विवाद है। भारत का कहना है कि ये इलाके काली नदी के पश्चिम में हैं। नेपाल का यह कदम दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट बढ़ा सकता है, खासकर जब दोनों के बीच 1850 किमी खुली सीमा है।

 

चीन का हाथ? कूटनीतिक तनाव बढ़ा

नोट छापने का ठेका चीनी कंपनी को दिए जाने से सवाल उठ रहे हैं। कुछ विशेषज्ञ इसे चीन की साजिश बता रहे हैं, जो भारत-नेपाल रिश्तों को कमजोर करना चाहता है। नेपाल ने पहले भी चीन के नक्शे पर आपत्ति जताई थी, लेकिन अब खुद चीनी मदद से विवाद बढ़ा रहा है। दोनों देशों के बीच व्यापार और सांस्कृतिक रिश्ते मजबूत हैं, लेकिन सीमा विवाद अब कूटनीतिक स्तर पर हल की मांग कर रहा है।

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