नक्सली कमांडर हिडमा की मौत पर पुवर्ती गांव में मातम का सन्नाटा, मां सदमे में डूबीं
सुकमा/रायपुर, 19 नवंबर 2025: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले के पुवर्ती गांव में मंगलवार को एक तरफा शोक की लहर दौड़ गई। कुख्यात नक्सली कमांडर माडवी हिडमा (असली नाम: संतोष) की एनकाउंटर में मौत की खबर मिलते ही गांव में सन्नाटा पसर गया। हिडमा के परिवारजन गहरे सदमे में डूबे हुए हैं, जबकि गांव के कई लोग उसके घर के बाहर जमा होकर शोक संवेदना व्यक्त करने लगे। हिडमा की मां माडवी पुंजी सदमे से घर के अंदर ही बंद हो गई हैं, और पूरे घर में मातम का गहरा माहौल व्याप्त है।
हिदमा (44 वर्ष) को आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मरेदुमिल्ली जंगल में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मार गिराया गया। इस ऑपरेशन में हिडमा की पत्नी माडवी राजे उर्फ राजक्का समेत छह नक्सली मारे गए, जिनमें देवे, लाकमल (चैतू), मल्ला (मल्लालू) और कामलू (कमलेश) शामिल थे। हिडमा पर केंद्र और राज्य सरकार ने कुल एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था, और वह सीपीआई (माओइस्ट) के सेंट्रल कमिटी का सबसे युवा सदस्य था।
View this post on Instagram
शोक की लहर के बीच यादें ताजा: कुछ दिनों पहले ही डिप्टी सीएम की अपील
हिदमा की मौत की खबर ने पुवर्ती गांव को स्तब्ध कर दिया है, जहां वह 1981 में एक साधारण आदिवासी परिवार में पैदा हुआ था। गांववासी बताते हैं कि बचपन से ही नक्सल विचारधारा की चपेट में आया हिडमा 1990 के दशक के अंत में संगठन से जुड़ा था। लेकिन सबसे मार्मिक पहलू यह है कि मौत से महज 11 दिन पहले छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने नक्सल प्रभावित पुवर्ती गांव का दौरा किया था।
उस मुलाकात में शर्मा ने हिडमा की मां माडवी पुंजी से भावुक होकर बात की। उन्होंने कहा था, “आप अपने बेटे को बुला लीजिए, अब उसके पास समय बहुत कम बचा है। अगर वह आत्मसमर्पण करना चाहता है, तो सरकार पूरा रास्ता खोलेगी और उसे सुरक्षा भी प्रदान करेगी।” मां ने तुरंत एक वीडियो संदेश रिकॉर्ड कर हिडमा को घर लौटने और हथियार त्यागने की अपील की थी। लेकिन हिडमा ने अपील को ठुकरा दिया। अब मां का वह संदेश एक दर्दनाक याद बन गया है। शर्मा ने नक्सली बारसे देवा के परिजनों से भी मुलाकात की थी, और गांव में विकास योजनाओं की बात की।
हिडमा का खूनी इतिहास: 26 हमलों का मास्टरमाइंड
हिडमा को ‘घोस्ट’ या ‘जंगल का शेर’ कहा जाता था। वह पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) बटालियन नंबर-1 का कमांडर था, जो नक्सल संगठन की सबसे घातक और मोबाइल यूनिट मानी जाती थी। उसके नेतृत्व में 26 से अधिक बड़े हमले हुए, जिनमें 150 से ज्यादा जवान और नागरिक मारे गए।
‘अप्रैल 2010 में दंतेवाड़ा में हुए IED ब्लास्ट में सीआरपीएफ के 76 जवान शहीद हो गए थे। मई 2013 में झीरम घाटी नरसंहार में नक्सलियों ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं पर हमला किया, जिसमें 27 लोग मारे गए, जिनमें महेंद्र कर्मा जैसे बड़े नेता भी शामिल थे। मार्च 2017 में सुकमा हमले में सीआरपीएफ कैंप पर फायरिंग हुई, जिसमें 25 जवान शहीद हो गए। हाल ही में अप्रैल 2021 में सुकमा-बीजापुर क्षेत्र में नक्सलियों ने सुरक्षाबलों पर घात लगाकर हमला किया, जिसमें 22 जवान शहीद हो गए।’
हिडमा की चार परतों वाली सिक्योरिटी रिंग और जंगल की गहरी जानकारी ने उसे वर्षों तक पकड़ से बचाए रखा। लेकिन 2025 में 1,300 से ज्यादा नक्सलियों के आत्मसमर्पण और लगातार ऑपरेशनों ने उसकी पकड़ ढीली कर दी।
नक्सल उन्मूलन अभियान में मील का पत्थर
सुरक्षा बलों ने इसे ‘नक्सलवाद के अंतिम कील’ करार दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक ‘नक्सल-मुक्त भारत’ का लक्ष्य रखा है, और हिडमा की मौत 30 नवंबर की डेडलाइन से 12 दिन पहले हो गई। शाह ने तुरंत अधिकारियों से बात की और इसे बड़ी सफलता बताया। बस्तर आईजी सुंदरराज पी ने पुष्टि की कि हिडमा की पहचान शवों से हुई।
पुवर्ती जैसे गांवों में अब शोक के साथ एक राहत का अहसास भी है। लेकिन हिडमा की मां का दर्द अनकहा रह गया। क्या यह मौत नक्सलवाद के अंत की शुरुआत है, या जंगल अभी भी कई ‘हिडमाओं’ को छिपाए हुए हैं? समय ही बताएगा।
