हसदेव बांध विस्थापितों ने ठेकेदार के खिलाफ जारी किया संघर्ष का ऐलान, मछली पालन पर दावा कायम
कोरबा। हसदेव जलाशय के विस्थापित ग्रामों के 22 पंजीकृत मछुआरा समितियों के पदाधिकारियों और ग्रामीणों ने “विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति” के तहत एक महत्वपूर्ण बैठक कर ठेकेदार के खिलाफ संघर्ष का ऐलान किया है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि समितियां ठेकेदार के लिए काम नहीं करेंगी और अपना मत्स्यखेट (मछली पालन) स्वतंत्र रूप से जारी रखेंगी।
ठेकेदार की बैठक नहीं, विरोध की बैठक हुई
ग्राम एतमा नगर में आयोजित इस बैठक का मकसद हाल ही में हसदेव बांध का 10 वर्षों के लीज पर अनुबंध प्राप्त ठेकेदार के खिलaf विरोध प्रदर्शन करना था। दिलचस्प बात यह रही कि ठेकेदार भी आज ही के दिन मत्स्य महासंघ के साथ मिलकर सभी मछुआरा समितियों के साथ बैठक करने वाला था, लेकिन विरोध के चलते वह बैठक में नहीं आया।
स्वतंत्र मत्स्यखेट का फैसला
बैठक में शामिल विस्थापित आदिवासी मछुआरा समाज के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से यह फैसला लिया कि वे ठेकेदार के लिए काम नहीं करेंगे और अपने पारंपरिक मत्स्यखेट के अधिकार को स्वतंत्र रूप से जारी रखेंगे। इस फैसले को विस्थापितों के संघर्ष की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
लंबे समय से चल रहा है संघर्ष
हसदेव जलाशय के विस्थापितों का मानना है कि उन्हें बांध परियोजना के कारण अपनी जमीन और आजीविका से वंचित किया गया है, और अब मछली पालन के अधिकार भी छीने जा रहे हैं। यह संघर्ष उनके आजीविका और अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक निर्णायक कदम है।
