12 राज्यों में कल से मतदाता सूची का SIR शुरू, विपक्ष का विरोध.. ममता मार्च निकालेंगी, DMK जाएगी सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली / रायपुर। देश के 12 राज्यों में 4 नवंबर से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इनमें छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप शामिल हैं।

हालांकि इस प्रक्रिया को लेकर कई विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे “पक्षपातपूर्ण” करार दिया है।
कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और वाम दलों ने SIR के विरोध में आंदोलन और कानूनी लड़ाई की घोषणा की है।

DMK जाएगी सुप्रीम कोर्ट

तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी डीएमके ने SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने विपक्षी दलों के साथ बैठक में कहा कि यह प्रक्रिया 2026 विधानसभा चुनाव से पहले नहीं की जानी चाहिए, क्योंकि इससे मतदाताओं पर असर पड़ सकता है।
बैठक में कांग्रेस, MDMK, CPI, CPI(M), IUML, SDPI, DMDK और कमल हासन की मक्कल नीधि मय्यम सहित कई दल शामिल हुए।

TMC का मार्च, ममता करेंगी नेतृत्व

पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने SIR प्रक्रिया को “शांत तरीके से की जाने वाली धांधली” बताया है।
टीएमसी 4 नवंबर को कोलकाता में विशाल मार्च निकाल रही है, जिसका नेतृत्व खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी करेंगी।

 केरल की वाम सरकार भी विरोध में

केरल की एलडीएफ सरकार ने भी SIR को लेकर चुनाव आयोग से पुनर्विचार का अनुरोध किया है। वामपंथी दलों का कहना है कि स्थानीय निकाय चुनाव से ठीक पहले यह प्रक्रिया लागू करना अनुचित है और इससे मतदाताओं पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

कांग्रेस का आरोप — “वोट चोरी की साजिश”

कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार दोनों पर निशाना साधा है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया है कि यह “वोट चोरी” की कवायद है।
बिहार में कांग्रेस ने इस प्रक्रिया के विरोध में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ भी निकाली थी।
पार्टी का कहना है कि SIR के जरिए विपक्षी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब किए जा रहे हैं।

 सपा की मांग — “SIR के साथ जातीय जनगणना भी हो”

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा है कि SIR एक बड़ी कवायद है, जिसे जातीय जनगणना से जोड़ा जाना चाहिए।
उनका कहना है कि अगर सरकार और चुनाव आयोग पारदर्शिता चाहते हैं, तो इसमें एक कॉलम जातीय डेटा का भी शामिल किया जाए।

 छत्तीसगढ़ में SIR की तैयारियां

छत्तीसगढ़ के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के अनुसार, राज्य में 2003 की मतदाता सूची को आधार बनाकर पुनरीक्षण कार्य शुरू किया गया है।
अब तक 71% मतदाताओं का मिलान पूरा हो चुका है, जो घर-घर सत्यापन चरण (4 नवंबर–4 दिसंबर) में 94–95% तक पहुंचने की उम्मीद है।
महिला मतदाताओं का हिस्सा लगभग 50% है।

 SIR की समयरेखा

  • 4 नवंबर–4 दिसंबर 2025: घर-घर गणना (House-to-House Verification)
  • 9 दिसंबर 2025: मसौदा मतदाता सूची का प्रकाशन
  • 9 दिसंबर 2025–8 जनवरी 2026: दावे और आपत्तियां
  • 9 दिसंबर 2025–31 जनवरी 2026: सुनवाई और सत्यापन चरण
  • 7 फरवरी 2026: अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी यशवंत कुमार ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे अपने बूथ स्तरीय एजेंटों (BLA) के माध्यम से बीएलओ को सहयोग करें ताकि छूटे हुए पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जा सकें और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जा सकें।

मतदाताओं के लिए सहायता:
किसी भी समस्या के लिए हेल्पलाइन 1950 पर संपर्क करें या BLO Call Request के माध्यम से सहायता प्राप्त करें।

 

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