छत्तीसगढ़ शराब घोटाला: चैतन्य बघेल 13 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में, अगली सुनवाई पर टिकी नजरें
रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में आरोपी पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सोमवार को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की 13 दिन की रिमांड खत्म होने के बाद अदालत ने उन्हें 13 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। चैतन्य को फिलहाल रायपुर सेंट्रल जेल में रखा गया है।
चैतन्य के वकील फैजल रिजवी ने बताया कि EOW ने भले ही पूछताछ के लिए एक दिन की रिमांड मांगी थी, लेकिन अदालत ने पूरी 13 दिन की अवधि मंजूर की। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए चैतन्य की जमानत याचिका दाखिल की है, जिस पर 8 अक्टूबर को सुनवाई होगी।
इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अदालत पहुंचे और बेटे से मुलाकात की। उन्होंने मामले को केंद्र सरकार की साजिश करार दिया, लेकिन न्याय प्रणाली पर भरोसा जताया।
ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की जांच में चैतन्य पर 16.70 करोड़ रुपये के अवैध धन को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश करने का आरोप है। यह घोटाला 2019 से 2022 के बीच कथित तौर पर आबकारी विभाग में हुई गड़बड़ियों से जुड़ा है, जिससे राज्य को 2000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ।
गौरतलब है कि चैतन्य बघेल को 18 जुलाई, उनके जन्मदिन पर, भिलाई स्थित आवास से ईडी ने हिरासत में लिया था। शुरुआती जांच में सामने आया कि शराब घोटाले से करीब 2,500 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई, जिसे विभिन्न लाभार्थियों तक पहुंचाया गया।
सुनवाई के दौरान EOW ने कस्टम मिलिंग घोटाले के एक अन्य आरोपी दीपेन चावड़ा को भी अदालत में पेश किया। अब तक इस घोटाले में 45 से ज्यादा लोग आरोपी बनाए जा चुके हैं।
अनिल टूटेजा, अनवर ढेबर के खिलाफ 1500 पन्नो का पूरक चालान किया पेश
छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कस्टम मिलिंग स्कैम (Custom Milling Scam) मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने 06 अक्टूबर 2025 को 1500 पेज का विस्तृत अभियोग पत्र (चार्जशीट) विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) रायपुर में दाखिल किया है। इस घोटाले में अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर को मुख्य आरोपी बनाया गया है। दोनों वर्तमान में केन्द्रीय जेल रायपुर में निरुद्ध हैं।
20 करोड़ रुपये की अवैध वसूली:
चालान में ईओडब्ल्यू ने बताया कि इस स्कैम में राइस मिलरों से अवैध वसूली कर कम से कम 20 करोड़ रुपये का असम्यक लाभ कमाया गया। राइस मिलरों से पैसे वसूलने के लिए मार्कफेड के जिला विपणन अधिकारियों पर दबाव बनाया जाता था। उनकी भूमिका यह थी कि मिलरों के बिलों को जानबूझकर लंबित रखा जाए, ताकि दबाव में आकर वे 20 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अवैध राशि देने को मजबूर हो जाएं।
कानूनी धाराएं
अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर पर निम्नलिखित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है: भारतीय दंड संहिता (IPC): धारा 120बी (साजिश), 384 (जबरन वसूली), 409 (आपराधिक विश्वासघात) भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018): धारा 11, 13(1)(क), 13(2)
इससे पहले फरवरी 2025 में ईओडब्ल्यू द्वारा इस घोटाले में रोशन चंद्राकर और मनोज सोनी के खिलाफ पहली चार्जशीट पेश की गई थी।
